बागी TMC सांसदों को बुलाने पर भड़का विपक्ष, सर्वदलीय बैठक में हंगामा
संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के 20 बागी सांसदों की नई पार्टी NCPI को भी आमंत्रित किया गया है, हालांकि उनके बैठने की व्यवस्था मुख्य टीएमसी सांसदों से अलग बेंचों पर की गई है
नई दिल्ली: 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले रविवार को दिल्ली में एक अहम सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं की नई पार्टी NCPI को आमंत्रित किए जाने पर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया और सांकेतिक रूप से बैठक से वॉकआउट कर दिया, हालांकि बाद में वे दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
विपक्ष का तर्क है कि जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक इस नई पार्टी को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है और सांसदों की अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं, तो इन्हें बैठक में किस आधार पर बुलाया गया। वहीं, बागी सांसदों की मांग पर उनके बैठने के लिए मुख्य टीएमसी सांसदों से अलग बेंचों का इंतजाम किया गया था।
इस मामले पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, सपा, डीएमके, जेएमएम, आप और वामदलों समेत पूरे विपक्ष ने इस आधारहीन निमंत्रण का कड़ा विरोध किया है।
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उन्होंने 91वें संविधान संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि आधिकारिक मंजूरी के बिना किसी अलग ब्लॉक के लिए कोई जगह नहीं है और संसदीय कार्य मंत्री का यह कदम नियमों के खिलाफ है। दूसरी तरफ, जेएमएम सांसद महुआ माझी ने भाजपा पर विपक्षी सांसदों को अपने साथ मिलाने की कोशिश का आरोप लगाया।
उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन (डीलिमिटेशन) प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन से झारखंड जैसे राज्यों में एसटी (ST) सीटों का भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए जब तक सीटों की सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, विपक्ष इस पर पुनर्विचार नहीं करेगा।
इस बार के मॉनसून सत्र में सरकार का मुख्य एजेंडा कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर केंद्रित है, जिसमें नए स्वरूप में परिसीमन बिल, महिला आरक्षण बिल को आगे बढ़ाना और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व मंत्रियों को हटाने से जुड़े प्रस्तावित कानून शामिल हैं।
दूसरी ओर, विपक्ष ने भी सरकार को महंगाई, विदेश नीति, भ्रष्टाचार और ई-20 (E20) विवाद जैसे मुद्दों पर घेरने की पूरी रणनीति तैयार की है। बैठक शुरू होने से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सत्र के सुचारू संचालन में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसद हर किसी की है, इसलिए विधायी कार्यों में सभी को भाग लेना चाहिए।
उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि सरकार विपक्ष की बातों को सुनेगी और उम्मीद जताई कि विपक्ष भी सरकार का पक्ष सुनेगा ताकि देश हित में बेहतर काम हो सके।
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