राहत के बाद भी झटका: 8 मामलों में दोषी आजम खान को जमानत, पर चुनाव लड़ने पर रोक
नई दिल्ली: दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों नेताओं की सजा को निलंबित करते हुए उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है, जिससे जेल से बाहर आने का उनका रास्ता साफ हो सकता है।
हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि कनविक्शन पर रोक लगाने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जो उनके चुनावी और राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
आजम खान पर दर्ज मुकदमों के रिकॉर्ड को देखें तो उनके खिलाफ कुल 93 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें से कई मामलों में वे पहले ही बरी हो चुके हैं या उन्हें जमानत मिल चुकी है।
अदालती ब्यौरे के मुताबिक, आजम खान को पहले भी कई मामलों में सजा मिल चुकी है। वे कुल 8 मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं (जिनमें से 2 मामलों में सेशन कोर्ट और 6 मामलों में मजिस्ट्रेट कोर्ट से सजा हुई।
निचली अदालतों से मिली सख्त सजा
मजिस्ट्रेट कोर्ट की दो सजाओं के खिलाफ उनकी अपीलें अपर अदालत से खारिज भी हो चुकी हैं। इसके अलावा, मौजूदा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र/पैन कार्ड मामले में रामपुर की MP/MLA कोर्ट ने उन्हें 10 साल तक की कठोर सजा सुनाई थी।
कानूनी मोर्चे पर आजम की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। अदालती आंकड़ों के मुताबिक, आजम खान के खिलाफ विभिन्न अदालतों में अभी भी 81 से अधिक मामले पेंडिंग हैं। अब्दुल्ला आजम के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में 44 मामले अभी भी विचाराधीन हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा नेता मोहम्मद आजम खान को बड़ी राहत देते हुए एक मामले में उनकी सजा को सस्पेंड कर दिया है और जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने आजम खान द्वारा काटी गई 4 साल से अधिक की जेल अवधि को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
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हालांकि, उनकी जेल से रिहाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस लखनऊ या रामपुर में दर्ज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ बी-वारंट (B-Warrant) हासिल करती है या नहीं। यदि पुलिस वारंट जारी करवाने में नाकाम रहती है, तभी वे जेल से बाहर आ पाएंगे।
अयोग्यता बरकरार: चुनाव लड़ने पर पाबंदी जारी
जमानत और सजा के निलंबन के बावजूद आजम खान फिलहाल चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act) की धारा 8 के प्रावधानों के अनुसार, 2 साल या उससे अधिक की सजा पाने वाला व्यक्ति सजा पूरी होने के बाद भी अगले 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहता है।
चूंकि हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक (Stay of Sentence) तो लगाई है, लेकिन दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, इसलिए उनकी चुनावी अयोग्यता बरकरार रहेगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया है कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के दोषी होने के फैसले (कनविक्शन) पर रोक नहीं लगेगी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर कहा कि ऐसी रोक सिर्फ बेहद खास और ‘असाधारण मामलों’ में ही लगाई जाती है।
इस आदेश के बाद पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम) के तहत दोनों नेताओं की अयोग्यता बरकरार रहेगी, यानी वे तब तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे जब तक बड़ी अदालत उनकी सजा को पूरी तरह खत्म नहीं कर देती। हाईकोर्ट अब जनवरी 2027 के तीसरे हफ्ते में इस मामले पर अंतिम सुनवाई करेगा।
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