यूपी चुनाव: सपा-कांग्रेस गठबंधन की तैयारी तेज, बसपा की बढ़ी मुश्किलें
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल बहुत तेज़ हो गई है। भाजपा और उसके साथी दाल सरकार के कामकाज गिनाते हुए अलग-अलग जातियों के वोटरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगे है। दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां भी हर सीट पर अपनी जीत का गणित लगाने में जुटी है।
चर्चा है कि कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन निश्चित माना जा रहा है, दोनों पार्टियों ने ऐसे युवाओं को चुना है जो समाजवादी और आंबेडकर विचारधारा को आगे बढ़ाते है और साथ की इन युवाओं को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है।
सपा ने ऊंचाहार से मनोज पासवान, बाबागंज से शिवशंकर सरोज, कौशांबी-फतेहपुर से राम करन निर्मल, मधुबन से विनीत कुशवाहा और कुशीनगर से राहुल राज को जिम्मेदारी दी है। वहीं, कांग्रेस ने बलिया से शैलेंद्र ध्रुव यादव, बेल्थरा रोड से मुरली मनोहर, बिलग्राम से सुभाष पाल और गौरा से तरुण पटेल को युवाओं को जोड़ने का जिम्मा सौंपा है।
सामान्य सीटों पर दलित युवाओं को प्रभारी बनाकर उतारे गए इस नए दांव से परंपरागत वोटबैंक की लामबंदी बढ़ने और बसपा से खिन्न युवाओं के जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मायावती ने ब्राह्मणों से पार्टी के साथ जुड़ने की अपील की
दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में अपना वजूद बचाने के लिए एक बार फिर ब्राह्मणों पर दांव लगाने की तैयारी कर रही है और मायावती ने ब्राह्मणों से पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ने की अपील की है। हालांकि, पार्टी के कई कद्दावर ब्राह्मण नेता लगातार बसपा का साथ छोड़ चुके हैं, जिसमें हाल ही में अंटू मिश्रा का निष्कासन भी शामिल है।
साल 2007 में बसपा ने 80 से ज्यादा ब्राह्मणों को टिकट दिया था और यह सोशल इंजीनियरिंग की नीति बहुत कामयाब रही थी और उनकी सरकार बनी थी। लेकिन साल 2017 आते-आते पार्टी के कई बड़े- बड़े नेतओं ने बसपा का साथ छोड़ना शुरू कर दिया और अन्य दलों में जा चुके है।
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