बिना नागरिकता मतदाता सूची में नाम का आरोप: सोनिया गांधी के खिलाफ मामले में कोर्ट ने मांगी लिखित दलीलें
नई दिल्ली: राउज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ बिना भारतीय नागरिकता हासिल किए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के मामले में दाखिल संशोधन याचिका पर सुनवाई हुई।
इस दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अपनी सारी दलीलें पूरी कर ली गई हैं और अदालत ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के अंदर अपनी-अपनी लिखित दलीलें जमा करने का आदेश दिया है। इस पर सोनिया गांधी की ओर से पेश वकील ने अगली सुनवाई पर कुछ अतिरिक्त दलीलें रखने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले की अगली तारीख 16 मई तय की है।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील विकास त्रिपाठी ने चुनाव आयोग से प्राप्त दस्तावेजों को अदालत के रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने तुरंत स्वीकार कर लिया। शिकायतकर्ता पक्ष ने साफ किया कि वे अभी सीधे मुकदमे की सुनवाई की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी मांग सिर्फ पुलिस से इस पूरे मामले की जांच कराने की है।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि सोनिया गांधी की ओर से पेश वकील उनके किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं और जब 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम जोड़ा गया था, तब उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिली थी।
शिकायतकर्ता पक्ष का तर्क है कि हो सकता है। कि धोखाधड़ी या गलत तरीके से तैयार दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम शामिल किया गया हो, क्योंकि कानून के अनुसार गलत जानकारी देना एक गंभीर अपराध है।
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और यह पूरा मामला जांच का विषय है, इसलिए अदालत को पुलिस को जांच के आदेश देने चाहिए। याचिका में यह भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिकता प्राप्त की थी, तो उनका नाम 1980 की नई दिल्ली मतदाता सूची में पहले से ही कैसे शामिल था, फिर 1982 में इसे अचानक क्यों हटाया गया और 1983 में नागरिकता मिलने से पहले किस आधार पर यह नाम दर्ज हुआ था।
वहीं, दूसरी तरफ पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की ओर से दाखिल जवाब में इस पूरी याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया जा चुका है।
गौरतलब है कि इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने सितंबर महीने में इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ वकील विकास त्रिपाठी ने यह संशोधन याचिका दाखिल की है।
कोर्ट ने सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख तय की है, जब इस विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं और जमा किए गए जवाबों पर विस्तृत विचार किया जाएगा।
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