इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिकारियों को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत पाए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में भारी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया कि दोनों अधिकारी स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर शपथपत्र के जरिए स्पष्ट करें कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और 125 में से 33 से 35 प्रश्न गलत कैसे निकल आए।
25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न त्रुटिपूर्ण होना गंभीर चिंता का विषय:
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि एक परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न त्रुटिपूर्ण होना बेहद गंभीर चिंता का विषय है और केवल गलत प्रश्नों के अंक अन्य सही प्रश्नों में पुनर्वितरित कर देना इसका कोई स्थायी या पर्याप्त समाधान नहीं हो सकता।
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सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को जानकारी दी कि विशेषज्ञों द्वारा पहले सिलेबस से बाहर पाए गए 29 प्रश्नों के अलावा 4 अन्य प्रश्न भी गलत पाए गए हैं, जिससे कुल त्रुटिपूर्ण प्रश्नों की संख्या 33 हो गई है। इसके बाद आयोग ने इन गलत प्रश्नों के अंकों को शेष सही प्रश्नों में बांटकर एक नई संशोधित चयन सूची जारी की है, जिसमें 42 नए अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने आयोग की इस कार्रवाई पर अपनी कड़ी असंतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि यह मामला केवल परिणाम में संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र निर्माण की गुणवत्ता तथा विश्वसनीयता पर एक बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।
इस मामले में आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को आगामी 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया है, जहां उन्हें शपथपत्र के माध्यम से यह बताना होगा कि परीक्षा के लिए प्रश्न कौन और किस प्रक्रिया के तहत तैयार करते हैं, विषय विशेषज्ञों का चयन कैसे किया जाता है और भविष्य में इस तरह की गंभीर गलतियों से बचने के लिए आयोग के पास क्या पुख्ता व्यवस्था है।
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