राम मंदिर चढ़ावे में घोटाले का आरोप, कांग्रेस ने संसद में की सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच की मांग
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी और दर्ज एफआईआर को दिखावा बताते हुए कहा गया है कि इसके जरिए केवल निचले स्तर के आउटसोर्स कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे और सार्वजनिक दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में कार्यवाही रोककर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
विपक्ष का आरोप है कि एक संगठित गिरोह ने करोड़ों राम भक्तों द्वारा दिए गए दान और कीमती आभूषणों में व्यवस्थित रूप से सेंध लगाई है, जो देश की भावनाओं के साथ विश्वासघात है। कांग्रेस ने इस मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में कराने की मांग की है।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले को छिपाने के लिए मंदिर परिसर की 7 से 8 महीने की सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर मिटा दी गई और गड़बड़ियों को उजागर करने वाले मुख्य लेखा अधिकारी को साल 2020-21 में अचानक पद से हटा दिया गया।
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साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी और दर्ज एफआईआर को दिखावा बताते हुए कहा गया है कि इसके जरिए केवल निचले स्तर के आउटसोर्स कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और असली मास्टरमाइंड्स को बचाया जा रहा है। कांग्रेस ने लोकसभा में इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत चर्चा की मांग की है।
संसद के अन्य मुद्दों पर, लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नेता द्वारा आसानी से पार्टियां बदलने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए एक नया और कड़ा दल-बदल विरोधी कानून बनाने की मांग की।
वहीं, राज्यसभा में कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश कर कावेरी नदी जल विवाद पर जल शक्ति मंत्रालय के जवाब को भ्रामक बताया और तमिलनाडु के किसानों के संकट को देखते हुए इस पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई।
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