गलत अधिकारिता का हवाला देकर हाईकोर्ट ने खारिज की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ वाली PIL
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गलत अधिकारिता में याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अनुरोध पर याचिका को वापस लेने की अनुमति देकर सक्षम अधिकारिता वाली अदालत के समक्ष याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेंगलुरु निवासी एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक अजीबोगरीब जनहित याचिका (PIL) को अधिकार क्षेत्र के आधार पर निस्तारित कर दिया है।
इस याचिका में केंद्र सरकार समेत 21 प्रतिवादियों को पक्षकार बनाते हुए, अमेरिका से पुणे के एक व्यक्ति द्वारा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संदर्भ में की गई किसी बात का विरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गलत अधिकार क्षेत्र में यह अर्जी दाखिल की है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें याचिका वापस लेने और सही अधिकारिता वाली सक्षम अदालत के समक्ष इसे दोबारा दायर करने की अनुमति दे दी।
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इसी बीच, लखनऊ पीठ से ही जुड़ी एक अन्य कानूनी राहत में कोर्ट ने जल निगम ग्रामीण के चीफ इंजीनियर राम भवन राम के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विजिलेंस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है।
चीफ इंजीनियर पर भ्रष्टाचार के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित करने और एक आलीशान महल जैसे घर में रहने का आरोप लगाते हुए दो लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद सरकार ने 24 नवंबर 2025 को विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने माना कि मामले में गहन विचार की आवश्यकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पूर्व में भी इन्हीं शिकायतों पर एक जांच हो चुकी है जिसमें उन्हें निर्दोष पाया गया था, और अब यह नई जांच केवल उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए की जा रही है।हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख तय की है।
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