मुसलमानों से अपना नेता चुनने की अपील, ओवैसी का विपक्षी दलों पर हमला
नई दिल्ली: राजनीति में ‘अब्दुल’ की भूमिका का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने टांडा की जनसभा में ‘अब्दुल’ (मुस्लिम समाज) की राजनीतिक भूमिका पर बड़ा सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि अब यह व्यवस्था नहीं चलेगी कि अब्दुल सिर्फ दरी बिछाए और दूसरे लोग आकर उस पर राज करें। ओवैसी ने मुसलमानों से अपना खुद का नेतृत्व (नेता) चुनने की जोरदार अपील की।
टांडा की जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम और अनुसूचित जाति के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए सपा, कांग्रेस और भाजपा पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं में काबिलियत की कोई कमी नहीं है, लेकिन राजनीतिक दल चाहते हैं कि मुस्लिम युवा नेता बनने के बजाय उनके लिए सिर्फ दरी बिछाने का काम करें।
रामपुर-मुरादाबाद में ओवैसी की हुंकार
ओवैसी ने मुसलमानों से आह्वान किया कि जब तक वे अपनी कतारों से अपना नेता खुद नहीं चुनेंगे, तब तक उनके साथ नाइंसाफी खत्म नहीं होगी। आजादी में बुजुर्गों की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुसलमानों को संविधान के मुताबिक हक नहीं मिला।
विरोधियों द्वारा रामपुर और मुरादाबाद आने पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए ओवैसी ने याद दिलाया कि 1952 में मौलाना अबुल कलाम आजाद भी रामपुर से ही पहला संसदीय चुनाव जीते थे।
इसे भी पढ़ें: 2029 पीएम पद पर विजय की दावेदारी को लेकर कांग्रेस की असहमत,राहुल गांधी को बताया पहली पसंद
अनुसूचित जाति के लोगों और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर ओवैसी ने कहा कि पेट की भूख तो बर्दाश्त की जा सकती है, लेकिन मान-सम्मान और इज्जत की बात आए तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यहां के दलितों और मुसलमानों को अस्पताल की गोली तो नहीं मिलती, लेकिन हुकूमत की बंदूक की गोली जरूर मिल जाती है। सभी को मिलकर नाइंसाफी के इस दौर को खत्म करना होगा।
असदुद्दीन ओवैसीने जनसभा में रामपुर के पिछड़ेपन पर चिंता जताते हुए सरकारी दावों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि जहाँ उत्तर प्रदेश की कुल साक्षरता दर 67 प्रतिशत है, वहीं रामपुर में यह केवल 53 प्रतिशत और महिलाओं में बेहद कम 44 प्रतिशत ही है।
ओवैसी ने स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी सरकार को विफल बताते हुए दावा किया कि जिले के 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया (खून की कमी) की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
