आर्यन गुप्ता बने नीट 2026 टॉपर: कैंसर विशेषज्ञ बनकर देश की सेवा करने का है लक्ष्य

आर्यन गुप्ता बने नीट 2026 टॉपर: कैंसर विशेषज्ञ बनकर देश की सेवा करने का है लक्ष्य

दादी को कैंसर से खोने के दर्द को अपना संकल्प बनाकर लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने नीट 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की, ताकि वे भविष्य में एक बेहतरीन ऑन्कोलॉजिस्ट बनकर कैंसर शोध और इलाज में अपना जीवन समर्पित कर सकें

लुधियाना: तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक मासूम बच्चे ने जब अपनी सबसे प्रिय दादी को कैंसर से जूझते और जिंदगी हारते देखा, तो उस उम्र में वह बीमारी की गंभीरता को तो नहीं समझ सका, लेकिन अपनों को खोने का दर्द उसके दिल में गहराई से बैठ गया।

उसी दिन उसने मन ही मन फैसला कर लिया कि वह बड़ा होकर कैंसर विशेषज्ञ बनेगा ताकि किसी और परिवार को वह पीड़ा न झेलनी पड़े।

वर्षों बाद वही अटूट संकल्प दुगरी निवासी आर्यन गुप्ता को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार नीट-यूजी (री-नीट) 2026 में 720 में से 715 अंक दिलाकर ऑल इंडिया रैंक-1 तक ले आया।

आर्यन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से आज पूरा परिवार, शिक्षक और शहर गर्व महसूस कर रहा है।

डॉक्टरों के परिवार में पले-बढ़े आर्यन के पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थीसियोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी माता डॉ. रीनू गुप्ता स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं।

आर्यन अपनी सफलता की सबसे बड़ी प्रेरणा अपनी दिवंगत दादी और बड़े भाई को मानते हैं। जब वे करीब आठ वर्ष के थे, तब उनकी दादी चौथी स्टेज के कैंसर से जूझ रही थीं।

आर्यन का दादी से गहरा लगाव था, वे उनके साथ समय बिताते और उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाते थे।

परिवार में कई अनुभवी डॉक्टर होने के बावजूद जब दादी को नहीं बचाया जा सका, तो इस घटना ने उनके बाल मन पर गहरी छाप छोड़ी और उन्होंने भविष्य में ऑन्कोलॉजिस्ट बनकर कैंसर के इलाज और शोध के क्षेत्र में काम करने की ठान ली।

इस सफर में आर्यन के बड़े भाई का योगदान भी बेहद अहम रहा, जिन्होंने पिछले वर्ष नीट में ऑल इंडिया रैंक-54 हासिल की थी और फिलहाल दिल्ली के प्रतिष्ठित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) से एमबीबीएस कर रहे हैं।

तैयारी के दौरान भाई ने उन्हें विषयों की रणनीति, नोट्स तैयार करने का तरीका, समय प्रबंधन और परीक्षा के तनाव से निपटने के गुर सिखाए।

आर्यन के मेंटर एवं एजुकेशन स्क्वायर के संचालक तेजप्रीत बताते हैं कि आर्यन की सबसे बड़ी विशेषता किसी भी विषय की गहराई तक जाकर उसे समझना रही।

यदि किसी टेस्ट में एक भी प्रश्न गलत हो जाता, तो वे तब तक चैन नहीं लेते थे जब तक उस गलती का कारण पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए, क्योंकि उनका मानना था कि रटने से अधिक जरूरी अवधारणाओं को समझना है।

आर्यन बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट रहे हैं। सराभा नगर स्थित कॉन्वेंट स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने वाले आर्यन ने दसवीं कक्षा के कैंब्रिज बोर्ड में गणित विषय में विश्व स्तर पर सर्वोच्च अंक हासिल किए थे और इसके बाद मेडिकल स्ट्रीम चुनकर बारहवीं में 97.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

पिछले दो वर्षों से वे लुधियाना स्थित कोचिंग संस्थान में नियमित तैयारी कर रहे थे। हालांकि, वर्ष 2026 की नीट परीक्षा आर्यन के लिए मानसिक रूप से आसान नहीं रही।

पहली परीक्षा के बाद पेपर लीक विवाद सामने आया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जिसके बाद री-नीट कराने का निर्णय हुआ।

आर्यन के अनुसार, परीक्षा समाप्त मानकर बंद की गई किताबों को दोबारा खोलना बेहद चुनौतीपूर्ण था और शुरुआत में मानसिक दबाव भी महसूस हुआ, लेकिन परिवार के सहयोग से उन्होंने एक सप्ताह के भीतर दोबारा लय हासिल कर ली।

दिलचस्प बात यह रही कि आज के डिजिटल दौर में भी आर्यन ने तैयारी के दौरान न तो किसी एआई प्लेटफॉर्म और न ही ऑनलाइन टूल्स का सहारा लिया।

उन्होंने केवल एनसीईआरटी की किताबों, क्लास नोट्स और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर भरोसा किया, क्योंकि उनका मानना है कि आमने-सामने बैठकर शंकाओं का समाधान करने से विषय की समझ अधिक मजबूत होती है।

भविष्य में आर्यन कैंसर का इलाज इतना सुलभ और किफायती बनाना चाहते हैं कि आर्थिक तंगी किसी मरीज की जिंदगी बचाने में बाधा न बने।

नीट अभ्यर्थियों को संदेश देते हुए वे कहते हैं कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र ईमानदारी से अपनी कमजोरियों को पहचानकर निरंतर मेहनत करना है, क्योंकि सच्चे समर्पण के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।


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Mehak B