अयोध्या: राम मंदिर विवाद पर RSS-VHP की बड़ी बैठक, 300 साधु-संतों संग डैमेज कंट्रोल की तैयारी
अयोध्या में 23 जुलाई को RSS-VHP की साधु-संतों के साथ होने वाली बैठक में राम मंदिर में कथित चोरी के बाद उपजे असंतोष और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए डैमेज कंट्रोल रणनीति पर मंथन होगा
उत्तर प्रदेश: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या के राम मंदिर में चोरी का मामला सामने आने से सूबे की सियासत गरमा गई है।
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे हमले कर रहा है, जिससे यह मामला भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
इस स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) सक्रिय हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में आगामी 23 जुलाई को RSS और VHP की साधु-संतों के साथ एक बड़ी बैठक होने जा रही है।
इस हाई प्रोफाइल बैठक को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक नुकसान की भरपाई के साथ-साथ चढ़ावा चोरी से आहत हिंदू समाज को साधने और उनका भरोसा मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
इस बैठक में श्रद्धालुओं के बीच पैदा हुई शंकाओं को दूर करने और उनका विश्वास बहाल करने के उपायों पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।
सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर से जुड़े विवाद के बाद सामने आई विभिन्न चर्चाओं के बीच बैठक का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के भ्रम को दूर करना है।
इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि मंदिर प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक और सामाजिक रूप से इसे एक बड़े डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।
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इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न अखाड़ों और मंदिरों के करीब 300 साधु-संतों के शामिल होने की संभावना है।
संतों के अलावा RSS और VHP के प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और दोनों संगठनों के पदाधिकारी संत समाज से संपर्क कर उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं।
बैठक के दौरान इस मामले में बनी एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं के अविश्वास को दूर करने की ठोस रणनीति बनाई जा सके।
चूंकि राम मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ देश की राजनीति का भी एक अहम विषय रहा है, इसलिए इसके प्रबंधन से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा असर जनभावनाओं और राजनीतिक माहौल पर पड़ना तय माना जा रहा है।
यह हाई प्रोफाइल बैठक 22 जुलाई को होने वाली ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की बैठक के ठीक अगले दिन आयोजित की जाएगी। संतों और पदाधिकारियों का यह मंथन राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में होगा।
बैठक में संत समाज की राय और रामकोट के साधु-संतों की सहमति के बाद ही आगे का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
राम मंदिर में चोरी के बाद उठे सवालों और विपक्ष के हमलों के बीच श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे निपटने के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के साथ-साथ सभी हिंदूवादी संगठन मिलकर आगे आ रहे हैं।
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