बंगाल में मतगणना से पहले अखिलेश ने दागा सवाल: स्मार्ट मीटर में चोरी तो EVM में क्यों नहीं ?

बंगाल में मतगणना से पहले अखिलेश ने दागा सवाल: स्मार्ट मीटर में चोरी तो EVM में क्यों नहीं ?

लखनऊ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की घड़ी करीब आते ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में प्रीपेड और स्मार्ट बिजली मीटरों के खिलाफ चल रहे जनता के विरोध का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब डिजिटल तकनीक से चलने वाले स्मार्ट मीटरों में बिजली की ‘चोरी’ और तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है, तो फिर ईवीएम के जरिए वोटों की हेराफेरी क्यों नहीं की जा सकती?

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि जिस तरह उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगने के बाद लोगों के बिल अचानक बढ़कर आ रहे हैं और सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की शिकायतें आम हो गई हैं, उसने यह साबित कर दिया है कि चिप और डिजिटल प्रोग्रामिंग के साथ छेड़छाड़ संभव है।

उन्होंने बंगाल मतगणना से ठीक पहले यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि ‘डिजिटल इंडिया’ का नारा देने वाली सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि जब जनता का बिजली बिल सुरक्षित नहीं है, तो उनका वोट कैसे सुरक्षित हो सकता है। सपा प्रमुख का यह हमला सीधे तौर पर उस संदेह को हवा देता है जिसे विपक्षी दल अक्सर ‘ईवीएम टेंपरिंग’ के नाम पर उठाते रहे हैं।

बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं, और ममता बनर्जी खुद भी मतगणना केंद्रों (स्ट्रांग रूम) की सुरक्षा को लेकर कई बार चिंता जता चुकी हैं।

अखिलेश यादव के इस सवाल को विपक्षी एकजुटता के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जहां वे ममता बनर्जी के सुर में सुर मिलाते हुए चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि जिस तरह यूपी की जनता अब स्मार्ट मीटरों को उखाड़ फेंकने की बात कर रही है, वही आक्रोश आने वाले समय में चुनावी प्रक्रियाओं के प्रति भी देखने को मिल सकता है।

बीजेपी ने अखिलेश यादव के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सत्ता पक्ष का कहना है कि जब भी विपक्ष को अपनी हार नजदीक दिखती है, वे ईवीएम और तकनीकी संस्थाओं पर दोष मढ़ना शुरू कर देते हैं।

बीजेपी नेताओं ने कहा कि स्मार्ट मीटर एक पारदर्शी व्यवस्था है जिसे भ्रष्टाचार रोकने के लिए लाया गया है, और इसका तुलनात्मक उदाहरण ईवीएम से देना केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश है।

हालांकि, मतगणना से महज कुछ घंटे पहले अखिलेश द्वारा उठाया गया यह ‘स्मार्ट मीटर बनाम ईवीएम’ का मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और विपक्षी खेमे में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।