प्रधानमंत्री पद जाने के बाद नेतन्याहू के सामने हैं बड़ी चुनौतियां, हो सकती है जेल

प्रधानमंत्री पद जाने के बाद नेतन्याहू के सामने हैं बड़ी चुनौतियां, हो सकती है जेल

नई दिल्ली(इंटरनेशनल ङेस्क)। इज़राइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सत्ता से बाहर होना केवल राजनीतिक कुर्सी गंवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन के सबसे बड़े कानूनी, व्यक्तिगत और अंतरराष्ट्रीय संकटों की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री पद की संवैधानिक सुरक्षा और कूटनीतिक ढाल हटने के बाद नेतन्याहू के सामने एक साथ कई मोर्चों पर अस्तित्व की लड़ाई शुरू हो जाएगी।

नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ा खतरा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के उस गिरफ्तारी वारंट से जुड़ा है, जो गाजा संघर्ष के दौरान मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों के तहत जारी किया गया है। पद पर रहते हुए उन्हें कूटनीतिक प्रतिरक्षा का जो लाभ मिलता है, वह प्रधानमंत्री न रहने पर समाप्त हो जाएगा, जिससे दुनिया के 120 से अधिक देशों में उनकी यात्राएं या तो असंभव हो जाएंगी या उन्हें गिरफ्तार किए जाने का जोखिम हमेशा बना रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय मंचों के अलावा घरेलू मोर्चों पर भी उनकी मुश्किलें कम नहीं होंगी। इज़राइल की अदालतों में उन पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के कई गंभीर मामले पहले से ही लंबित हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें अदालती कार्यवाहियों और कानूनी शिकंजे से जो राजनीतिक सुरक्षा मिलती रही है, सत्ता जाते ही वह कवच पूरी तरह हट जाएगा। यदि अदालतें उन्हें इन मामलों में दोषी ठहराती हैं, तो उन्हें न केवल जेल की हवा खानी पड़ सकती है, बल्कि नैतिक पतन के प्रावधान के तहत उनके राजनीति में लौटने पर हमेशा के लिए प्रतिबंध भी लग सकता है।

इसके अलावा, सात अक्टूबर 2023 के हमास हमले की खुफिया विफलता और उसके बाद के सैन्य फैसलों को लेकर बनने वाले राष्ट्रीय जांच आयोग की सुई सीधे उन पर आकर टिकेगी। इस विफलता का पूरा ठीकरा उनके सिर फूटने से उनकी पूरी राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ जाएगी।

राजनीतिक दल के भीतर भी हालात तेजी से बदल सकते हैं। दशकों से लिकुड पार्टी के सर्वेसर्वा रहे नेतन्याहू के हाथ से सत्ता फिसलते ही पार्टी के भीतर महत्वाकांक्षी नेता नेतृत्व संभालने के लिए बगावत का झंडा उठा सकते हैं।

विपक्ष में रहकर अपनी पुरानी पकड़ बनाए रखना और पार्टी को एकजुट रखना उनके लिए बेहद कठिन साबित होगा। इन तमाम संकटों से बचने के लिए अंततः उनके पास केवल यही विकल्प बचेगा कि वे अदालत के साथ कोई कानूनी समझौता करें या राजनीति से पूर्ण संन्यास ले लें।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ते ही नेतन्याहू अदालती मुकदमों, जेल के डर और अंतरराष्ट्रीय अलगाव के ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाएंगे जिससे निकलना उनके लिए नामुमकिन सा हो जाएगा।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।