कांग्रेस कभी भी आरएसएस और बीजेपी से समझौता नहीं कर सकती: सोनिया गांधी
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी इन दिनों अपनी आगामी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर खासी चर्चा में हैं। किताब की रिलीज से पहले दिए गए साक्षात्कारों और ‘द हिंदू’ में लिखे अपने एक विशेष लेख के जरिए उन्होंने अपने निजी जीवन के पन्नों को तो पलटा ही है, साथ ही केंद्र की मौजूदा सरकार और देश के राजनीतिक हालातों पर भी बेबाक राय रखी है।
राजनीति में अक्सर दलों के बीच मेल-मिलाप और गठबंधनों का दौर चलता रहता है, लेकिन सोनिया गांधी ने इसे लेकर अपनी असहजता खुलकर जाहिर की है। उनका मानना है कि कई बार राजनीतिक मजबूरी में अलग विचारधारा वाले दलों से भी हाथ मिलाना पड़ता है, लेकिन ऐसे फैसले उन्हें व्यक्तिगत रूप से कभी सहज नहीं लगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने अतीत में कभी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ कोई समझौता नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा कोई मेल संभव नहीं है। पार्टी के भीतर भले ही कुछ नेताओं के विचारों में भिन्नता रही हो, लेकिन कांग्रेस की मूल और आधिकारिक सोच हमेशा से संविधान प्रदत्त अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सेक्युलरिज्म के पक्ष में रही है।
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार के पिछले वर्षों के कामकाज पर गहरा असंतोष जताया है। उनके मुताबिक, इस दौरान देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं को गहरा आघात पहुंचा है। आज आम जनता को इस नुकसान की भरपाई की चिंता सताने लगी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्थिति से उबरने का एकमात्र रास्ता देश में सुशासन की वापसी और सत्ता परिवर्तन है। इसी उद्देश्य के साथ कांग्रेस ने समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करने की पहल की है, जिससे आगामी चुनावों में राजनीतिक बदलाव की मजबूत संभावनाएं बन रही हैं।
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राजनीतिक बयानों से इतर, सोनिया गांधी ने ‘द हिंदू मैगज़ीन’ में लिखे अपने लेख में यह साफ किया है कि उनकी यह किताब कोई राजनीतिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक बेहद निजी किताब है।
“मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन शायद ही कभी इस बात की गहरी समझ दी गई हो कि वे कौन थे, उनके मकसद क्या थे, उन्होंने किन संघर्षों का सामना किया, और उनमें इंसानी कमियां क्या थीं। मैं उन्हें ईमानदारी से पेश करना चाहती थी—ऐसे लोगों के रूप में जिन्हें मैं जानती थी और जिनसे प्यार करती थी।”
प्रकाशित इस लेख के माध्यम से उन्होंने अपने निजी जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक के संघर्षों, अपनों के प्रति प्रेम और अपने परिवार की अनकही कहानियों की एक गहरी और सच्ची झलक पाठकों के सामने रखी है।
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