बड़ी खबर: सोनिया गांधी के नागरिकता से पहले वोटरलिस्ट में नाम मामले की होगी जांच
नई दिल्ली: एमपी एमएलए मामलों के विशेष न्यायाधीश ने सोनिया गांधी से जुड़ी एक समीक्षा याचिका को स्वीकार कर लिया है। जो भारतीय नागरिक बनने से पहले कांग्रेस नेता सोनिआ गाँधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने से जुड़ी शिकायत में मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।
जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम भारत की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। विशेष अदालत अब इस मामले की दोबारा कानूनी समीक्षा करेगी।
कोर्ट का बड़ा फैसला
सत्र अदालत सेशंस कोर्ट ने साल 2025 में निचली अदालत मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा दिए गए पुराने आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले को नए सिरे से सुनवाई करने और पूरा कारण स्पष्ट करते हुए नया आदेश जारी करने के लिए वापस भेज दिया है।
मजिस्ट्रेट अदालत ने कांग्रेस नेता सोनीया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया था।
सेशंस कोर्ट ने कहा कि सोनिया गांधी के खिलाफ इस शिकायत को बिना जांचे-परखे दस्तावेजों की केवल फोटोकॉपी के आधार पर ही खारिज कर दिया गया था, जो कि पूरी तरह गलत था।
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अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के पुराने फैसले को रद्द करने लायक बताते हुए कहा कि नागरिकता से जुड़े मुद्दों और अधिकार क्षेत्र क्षेत्राधिकार को लेकर निचली अदालत की टिप्पणियां कानूनी रूप से सही नहीं थीं, इसलिए इस मामले की दोबारा नए सिरे से गहन जांच होनी चाहिए।
निचली अदालत के फैसले पर उठे सवाल
Sessions Court ने साफसाफ बताय है कि निचली अदालत के पुराने फैसले में यह साफ साफ नहीं बताय गया था कि इस मामले में कोई गंभीर या संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। इसके साथ ही कोर्ट ने नागरिकता के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर निचली अदलात द्वारा की गई टिप्पड़ियो को भी पूरी तरह अनुचित बताया।
अब इस मामले की सभी कानूनी खामियों को दूर कर नए सिरे से सुनवाई के लिए फाइल वापस भेज दी गई है। जिस की अगली तारीख 29 सितंबर 2026 तय की गई है।
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