चीफ जस्टिस की युवा वकीलों को नसीहत: सोशल मीडिया से नहीं, कोर्ट रूम में काम से कमाएं इज्जत
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नए ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ को सोशल मीडिया की चमक-दमक से दूर रहकर कोर्ट रूम में कड़ी मेहनत और ईमानदारी से पहचान बनाने की सलाह दी है
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नए बने ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ (AOR) को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया की चमक-दमक के बजाय अपने काम की गुणवत्ता और कोर्ट रूम की तैयारी से अपना करियर संवारें।
साल 2025 बैच के एओआर सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए CJI ने कहा कि केवल उपाधियां किसी का करियर नहीं बनातीं, बल्कि वकीलों का करियर उनके काम की क्वालिटी से तय होता है।
उन्होंने युवा वकीलों पर जोर दिया कि जब भी किसी केस फाइल में उनका नाम आए, तो उनकी पहचान एक पूरी तैयारी और नैतिकता के साथ काम करने वाले पेशेवर के तौर पर होनी चाहिए।
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समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने ऑनलाइन लोकप्रियता को पेशेवर सफलता मानने की भूल न करने की हिदायत दी।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया के जरिए ध्यान खींचना और मशहूर होना आसान हो सकता है, लेकिन लोकप्रियता और विश्वसनीयता दो अलग बातें हैं।
वकीलों को टीआरपी की चिंता करने वाले टीवी चैनलों की तरह काम करने से बचना चाहिए, क्योंकि असली सम्मान सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन से नहीं, बल्कि कोर्ट रूम के अंदर कड़ी मेहनत, साथियों, क्लाइंट्स और बार के सदस्यों से मिलता है।
इसके साथ ही उन्होंने नए एओआर को याद दिलाया कि यह पद केवल पेशेवर तरक्की नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है, इसलिए उन्हें गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों की मदद के लिए कानूनी सहायता (लीगल एड) के मामलों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
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