CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान “बच्चे गलती कर देते हैं, पर संवैधानिक मर्यादा जरूरी”
सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक युवा वकील की कथित अभद्रता पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान हुई उस घटना पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें एक युवा वकील पर उनके खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और अदालत कक्ष के भीतर दस्तावेज फेंकने का आरोप लगा था।
ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन (AISAA) की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने बेहद संतुलित अंदाज में अपनी बात रखते हुए कहा कि बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं।
लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, मर्यादा और पवित्रता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और हर किसी को इस दायित्व को निभाना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक है और इसकी जिम्मेदारी केवल न्यायाधीशों या वकीलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।
इस समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए एक बड़े फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए एक नई रोस्टर व्यवस्था तैयार की गई है।
इस नए रोस्टर के तहत तीन की जगह चार विशेष पीठों का गठन किया गया है, जिनमें से दो पीठें दीवानी (सिविल) मामलों की और दो पीठें आपराधिक (क्रिमिनल) मामलों की सुनवाई करेंगी।
इन चारों पीठों का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है और उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से सुप्रीम कोर्ट में पुराने मामलों की संख्या कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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इसके साथ ही न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि कॉलेजियम किसी भी नाम पर निर्णय लेने से पहले न्यायिक योग्यता, ईमानदारी, अनुभव और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन करता है।
कॉलेजियम केवल व्यक्तिगत क्षमता ही नहीं देखता, बल्कि विभिन्न हाईकोर्टों का क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विविधता भी ध्यान में रखता है, ताकि देश का सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान की भावना और देश की विविधता का सही प्रतिनिधित्व कर सके।
यह बातें मुख्य न्यायाधीश उस समारोह में कह रहे थे, जिसमें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना का सम्मान किया गया।
इसके अलावा हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल को भी सम्मानित किया गया।
समारोह की शुरुआत करते हुए ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश सी. अग्रवाला ने कहा कि हिसार की जिला अदालतों से लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने तक न्यायमूर्ति सूर्यकांत का सफर प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर मेहनत का प्रेरक उदाहरण है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने की मुख्य न्यायाधीश की सोच ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और न्यायपालिका (बेंच) तथा अधिवक्ताओं (बार) के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया है।
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