चुनाव लड़ेगी कॉकरोच जनता पार्टी! चुनाव आयोग पहुंचा आवेदन

चुनाव लड़ेगी कॉकरोच जनता पार्टी! चुनाव आयोग पहुंचा आवेदन

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को अब असली राजनीतिक दल बनाने की तैयारी है। हरियाणा के एक वकील ने चुनाव आयोग में पंजीकरण  के लिए आधिकारिक आवेदन दे दिया है। जानिए क्या है पूरा मामला।

नई दिल्ली। इंटरनेट पर मीम्स और व्यंग्य के जरिए शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का आंदोलन अब देश की मुख्यधारा की राजनीति में एंट्री करने जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसी बड़ी पार्टियों को फॉलोअर्स की रेस में टक्कर देने के बाद, अब इस डिजिटल मोर्चे को एक वास्तविक राजनीतिक दल में बदलने के लिए भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया गया है।

हरियाणा के पानीपत निवासी एडवोकेट सुधीर जाखड़ ने चुनाव आयोग में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत इस पार्टी के आधिकारिक पंजीकरण के लिए आवेदन दाखिल कर दिया है।

संस्थापक अमेरिका में, तो वकील ने संभाली कमान:

दरअसल, इस डिजिटल आंदोलन की शुरुआत बोस्टन यूनिवर्सिटी (यूएसए) में पढ़ रहे छात्र अभिजीत दीपके ने की थी। आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता और युवाओं के गुस्से को देखते हुए, समर्थकों ने दीपके से भारत लौटकर इसे आधिकारिक पार्टी बनाने का आग्रह किया था। सुधीर जाखड़ ने आवेदन में खुद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक (National Convener) बताया है।

पंजीकरण कराने वाले वकील सुधीर जाखड़ ने बताया:

“चूंकि अभिजीत अभी विदेश में हैं और देश भर के युवाओं की भावनाएं इस आंदोलन से जुड़ चुकी हैं, इसलिए हमने इसे जमीन पर उतारने का फैसला किया। अगर हम इसे रजिस्टर नहीं कराते, तो कोई और इस नाम का दुरुपयोग कर सकता था।”

कैसे हुआ था ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जन्म?

इस अनोखी पार्टी की शुरुआत देश के सुप्रीम कोर्ट की एक कथित टिप्पणी के बाद पैदा हुए आक्रोश से हुई थी। एक मामले की सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया एक्टिविज्म को लेकर ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का जिक्र आया था। हालांकि बाद में इस पर स्पष्टीकरण भी आया, लेकिन इंटरनेट पर युवाओं ने इसे अपने स्वाभिमान से जोड़ लिया।

अभिजीत दीपके ने महज 1 घंटे के भीतर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से इस पार्टी की वेबसाइट और एंथम तैयार कर दिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर लाखों युवा इससे जुड़ गए।

पार्टी की अनोखी सदस्यता शर्तें: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस पार्टी का सदस्य बनने के लिए जो शर्तें रखी गई थीं, वे बेहद व्यंग्यात्मक थीं—जैसे व्यक्ति का “निश्चित रूप से बेरोजगार होना, आलसी होना, रोजाना लंबे समय तक ऑनलाइन रहना और पेशेवर तरीके से शिकायत करने की क्षमता होना।”

क्या चुनाव आयोग देगा ‘कॉकरोच’ चुनाव चिन्ह?

आवेदन तो जमा हो गया है, लेकिन पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसका सिंबल (Logo) है। चुनाव आयोग के सिंबल ऑर्डर 1968 के नियमों के मुताबिक, साल 2012 के बाद से किसी भी नए राजनीतिक दल को पशु या पक्षी (जीव-जंतु) का चुनाव चिन्ह देना प्रतिबंधित है। ऐसा पशु क्रूरता को रोकने के लिए किया गया था (हाथी और शेर इसके अपवाद हैं)।

चूंकि कॉकरोच (तिलचट्टा) जीवों/कीटों की श्रेणी में आता है, इसलिए चुनाव आयोग द्वारा इस नाम या सिंबल को मंजूरी देना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। फ्री सिंबल्स की सूची में नूडल बाउल और प्रेशर कुकर जैसे 164 विकल्प तो हैं, लेकिन कोई कीट शामिल नहीं है।

ग्राउंड पर क्या होंगे पार्टी के मुद्दे?

शुरुआत में सोशल मीडिया पर दलबदलुओं पर 20 साल का बैन और सेवानिवृत्ति के बाद जजों के राज्यसभा जाने पर रोक जैसे पांच मुख्य एजेंडे रखे गए थे।

हालांकि, चुनाव आयोग में दिए गए आवेदन में सुधीर जाखड़ ने इसके उद्देश्यों को थोड़ा बदला है। अब पार्टी के मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:

  • संविधान के अनुच्छेद 51-A के तहत मौलिक कर्तव्यों को बढ़ावा देना।
  • शासन और प्रशासन में पारदर्शिता तथा सामाजिक जवाबदेही।
  • पर्यावरण संरक्षण और कानूनी जागरूकता फैलाना।

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने की भी चर्चाएं हैं। यदि चुनाव आयोग इस आवेदन को स्वीकार करता है, तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल (RUPP) बन जाएगी।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।