हल्द्वानी में कांग्रेसी सत्याग्रह: राहुल गांधी पर मुकदमें के विरोध में चरखा चलाकर प्रदर्शन
नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग को लेकर एक नया सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया है। यह पूरा विवाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद मंच को गंगाजल से धोने वाले लोगो पर कार्यवाई की मांग से जुड़ा है।
कार्यकर्ताओ का कहना है की जब राहुल गाँधी ने इस शुद्धिकरण के मुद्दे को उठाया, तो उनके खिलाफ उल्टा केस दर्ज कर दिया गया जो की पूरी तरह गलत है। अब कांग्रेस नेता उस मुकदमे को तुरंत वापस लेने और मंच का शुद्धीकरण करने वालों पर सख्त कार्यवाई करने की मांग कर रहे है।
बुद्ध पार्क में चल रहे शांतिपूर्ण सत्याग्रह में कांग्रेस नेताओ और कार्यकर्ताओ ने बीजेपी सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया। इस प्रदर्शन में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनील पवार भी शामिल हुए।
लोकतंत्र में शांति से आवाज उठाने वालो पर मुकदमे दर्ज करना पूरी तरह गलत
कार्यकर्ताओं ने गांधीवादी रास्ता अपनाते हुए चरखा चलाकर अपना विरोध दर्ज किया। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की कार्यवाई पर नाराजगी जताते हुए राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज केस को तुरंत वापस लेने की मांग की। कांग्रेस नेताओ का कहना है की लोकतंत्र में शांति से आवाज उठाने वालो पर मुकदमे दर्ज करना पूरी तरह गलत है।
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कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड में मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले को लेकर कड़ा विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह करते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई है।
सत्याग्रह के दौरान सुनील पवार ने आरोप लगाया कि हल्द्वानी की इस घटना का सीएम धामी द्वारा समर्थन किया जाना यह दर्शाता है कि वे संविधान की जगह पुनः मनुस्मृति लाना चाहते हैं, जबकि आंदोलनकारी नीरज तिवारी ने कहा कि खरगे के भव्य कार्यक्रम से बौखलाकर यह शुद्धिकरण किया गया और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले राहुल गांधी पर ही एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत है, जिसके विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पवार की अगुवाई में संस्था के कार्यकर्ताओ ने एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। संगठन की को ऑडिनेटर राधा आर्या ने बताया की वे लोग गांधीजी के सत्य और आहिंषा के सिद्धांतो को याद दिलाने के लिए शांतिपूर्वक चरखा चला रहे थे। उनका मकसद इस प्रदर्शन के जरिए समाज को एक सकारात्मक संदेश देना था। हालांकि उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी इस शांतिपूर्ण मुहीम को आगे बढ़ाने में सरकार और स्थानीय प्रशसन का बिल्कुल भी सहयोग नहीं मिल रहा है।
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