जनगणना के खिलाफ तमिलनाडु में कांग्रेस का मोर्चा: 10 शहरों में चलाएगी महा-जागरूकता अभियान
नई दिल्ली: तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) केंद्र सरकार की प्रस्तावित जातिगत जनगणना के खिलाफ गुरुवार से पुरे राज्य में एक बड़ा जन-जागरूकता अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जनगणना के दौरान जातीय आंकड़े एकत्र करने के प्रस्तावित तरीके की उन कमियों को उजागर करना है, जिन्हें पार्टी गंभीर खामियां मानती है।
तमिलनाडु के 10 बड़े शहरों में जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के जरिए जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा करते हुए टीएनसीसी अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्र सरकार के ओपन-एंडेड सवालों से जाति की जानकारी जुटाने के प्रस्ताव का विरोध कर ड्रॉप-डाउन सिस्टम की वकालत की है
कर्ज माफी और नाम छिपाने पर सवाल
तथा एआईसीसी महासचिव गुलाम अहमद मीर व द्रविड़र कझगम के अध्यक्ष के. वीरमणि की मौजूदगी में होने वाले इस अभियान के तहत केंद्र पर ओबीसी की वास्तविक आबादी छिपाकर उन्हें राजनीतिक सत्ता, शिक्षा और रोजगार में उचित प्रतिनिधित्व से वंचित करने की सोची-समझी रणनीति अपनाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि जब एससी-एसटी के लिए स्पष्ट सूची है
तो ओबीसी के लिए ओपन-एंडेड फॉर्मेट क्यों रखा जा रहा है, और साथ ही केंद्र पर 2015 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सार्वजनिक बैंकों द्वारा कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के नाम छिपाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
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उनका कहना है कि बैंको द्वारा बट्टे खाते में डाले गए ₹35,716 करोड़ में से रुपए के राइट-ऑफ में से केवल 28% रकम की ही वसूली हो पाई है जो बेहद चिंताजनक है। वही दूसरी ओर आगामी उपचुनावो में वामपंथी दलों द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर उन्होंने हैरानी जताई।
टैगोर ने कहा कि वे किसी पार्टी की अंदरूनी रणनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते लेकिन यह बात समझ से परे है कि जिन दलों ने विधानसभा में सरकार का समर्थन किया वे अब चुनाव अलग होकर लड़ रहे है।
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