संसद में संविधान संशोधन विधेयक 2026′ और ‘परिसीमन विधेयक 2026’ पेश

संसद में संविधान संशोधन विधेयक 2026′ और ‘परिसीमन विधेयक 2026’ पेश

नई दिल्ली। आज संसद की कार्यवाही की शुरुआत होते ही केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक 2026’ पेश होने के साथ ही विपक्ष ने अपने कड़े तेवर दिखाए हैं।

सरकार ने तर्क दिया कि जनसंख्या के बढ़ते बोझ और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को संतुलित करने के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, लेकिन इस पर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया।

वहीं कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने सदन के वेल में आकर विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि यह कदम उन राज्यों के खिलाफ है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है। विपक्ष ने ‘संघीय ढांचे के संरक्षण’ और ‘जाति जनगणना’ की मांग को लेकर नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को दोपहर तक स्थगित करना पड़ा।

शून्यकाल के दौरान कुछ सदस्यों ने भारत की पहली डिजिटल जनगणना की सुरक्षा और किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी के मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की।

राज्यसभा में भी इसी प्रकार का गतिरोध बना रहा, जहाँ विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत अन्य कार्यों को रोककर परिसीमन पर चर्चा की मांग की। फिलहाल सदन में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा और भविष्य की वोटिंग को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

संसद कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल साइट X पर अपने पोस्ट में कहा, “विपक्ष महिला आरक्षण के नाम पर पेश किए गए दोषपूर्ण परिसीमन विधेयकों द्वारा संसद को हाईजैक नहीं होने देगा। हम एकजुट हैं और अपनी पूरी ताकत से लोकतंत्र पर इस कपटपूर्ण हमले का मुकाबला करेंगे।”


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।