क्या है संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2026, विपक्ष क्यों कर रहा विरोध?
नई दिल्ली। संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2026 भारत की संसदीय व्यवस्था में एक युगांतरकारी बदलाव का प्रस्ताव रखता है जिसका मुख्य उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 करना है।
इस विधेयक के माध्यम से सरकार संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन करना चाहती है ताकि परिसीमन की प्रक्रिया को जनगणना के साथ जोड़कर महिला आरक्षण को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके।
सरकार का तर्क है कि बढ़ती आबादी के सही प्रतिनिधित्व और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए सीटों का विस्तार अनिवार्य है। हालांकि, विपक्ष इस विधेयक को लेकर बेहद आक्रामक है और इसके पीछे कई गंभीर संवैधानिक चिंताएं व्यक्त कर रहा है।
विरोध का सबसे बड़ा कारण क्षेत्रीय असंतुलन का डर है, क्योंकि दक्षिण भारतीय राज्यों का मानना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ने से उत्तर भारत के राज्यों का राजनीतिक वर्चस्व बढ़ जाएगा और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।
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इसके साथ ही, विपक्षी दल महिला आरक्षण के भीतर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित न किए जाने को सामाजिक अन्याय बता रहे हैं। विपक्ष यह सवाल भी उठा रहा है कि बिना नई जनगणना के पुराने आंकड़ों पर आधारित परिसीमन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह संघीय ढांचे को कमजोर करने की एक कोशिश है।
इस प्रकार, जहां सत्ता पक्ष इसे ‘प्रतिनिधित्व का नया युग’ कह रहा है, वहीं विपक्ष इसे ‘क्षेत्रीय भेदभाव और राजनीतिक लाभ का औजार’ मानकर इसका डटकर मुकाबला कर रहा है।
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