दिपके का सत्ता पर सीधा प्रहार: ‘विपक्ष में आंदोलन अधिकार, तो सत्ता में आते ही खतरा कैसे’
नई दिल्ली: अभिजीत दिपके का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से बाजार और व्यापार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता, बल्कि वास्तविक नुकसान तब सामने आता है जब प्रशासन एहतियात के नाम पर पूरे शहर में आवाजाही पर रोक, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और सख्त पाबंदियां लागू करने जैसा कदम उठाता है।
अभिजीत दिपके ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हमेशा गांधीजी के शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर जैसे शहरों में पूरी तरह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करती रही है, और यहां तक कि जयपुर में अपने ऊपर हमले के बावजूद उन्होंने संवैधानिक मूल्यों के तहत हिंसा का जवाब नहीं दिया, क्योंकि सरकार द्वारा उन्हें ‘अराजकतावादी’ साबित करने की लगातार कोशिशों के बावजूद सत्ता से सवाल पूछना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और विरोध करना कोई अराजकता नहीं बल्कि लोकतंत्र का बुनियादी रूप है।
उन्होंने मौजूदा सत्ता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज जो लोग सत्ता में हैं, उन्होंने विपक्ष में रहते हुए दशकों तक विरोध प्रदर्शन किए और सरकार से सवाल पूछे, इसलिए जब विपक्ष में रहते हुए इन प्रदर्शनों को ‘लोकतांत्रिक अधिकार’ माना जाता है और सत्ता में आने पर उन्हीं अधिकारों को ‘कानून-व्यवस्था के लिए खतरा’ बताकर पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो यह सरासर बहुत बड़ा पाखंड है।
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अभिजीत दिपके का कहना है कि विरोध प्रदर्शन कोई विशेष अधिकार नहीं बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक हक है, इसलिए चुनाव के बाद भी जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही मांगना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जनता का कर्तव्य है क्योंकि लोकतंत्र सिर्फ वोट डालने तक सीमित नहीं रहता।
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