डिजिटल डेटा प्राइवेसी कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा DNPA, आज होगी अहम सुनवाई
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नई दिल्ली: देश के 21 बड़े डिजिटल न्यूज़ चैनलों और अखबारों के संगठन डीएनपीए (DNPA) ने सरकार के नए ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून’ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मीडिया जगत का कहना है कि जब यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों में डेटा प्राइवेसी से जुड़े ऐसे कानून बनाए गए, तो उनमें पत्रकारिता के काम को पूरी छूट दी गई थी, लेकिन भारत के नए कानून में मीडिया को ऐसी कोई राहत नहीं दी गई है।
डीएनपीए का आरोप है कि इस कानून के कड़े नियम लागू होने से पत्रकारों के लिए सच्चाई सामने लाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। गौरतलब है कि इस नए प्राइवेसी कानून के कई सख्त नियम मई 2027 से पूरे देश में लागू होने वाले हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट आज (27 अक्टूबर 2026) अहम सुनवाई करेगा।
मीडिया संगठनों का कहना है कि नए कानून के मुताबिक अब किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी का इस्तेमाल करने से पहले उसकी लिखित मंजूरी लेना जरूरी होगा।
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पत्रकारों का सवाल है कि अगर वे किसी बड़े घोटाले या भ्रष्टाचार की खोजी रिपोर्टिंग (इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म) कर रहे हैं, तो वे आरोपी व्यक्ति से उसकी ही जांच के लिए लिखित सहमति कैसे मांग सकते हैं मीडिया घरानों को डर है कि इससे देश में खोजी पत्रकारिता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इसके अलावा, इस कानून के तहत सरकार को किसी भी संस्था से डेटा मांगने के असीमित अधिकार मिल गए हैं, जिससे सरकार पत्रकारों पर उनके गोपनीय सूत्रों (सोर्सेज) और अंदरूनी दस्तावेजों को उजागर करने का दबाव बना सकती है।
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