कब कब बदला अलीगढ का नाम, अब हरिगढ़ के लिए शुरू हुई प्रशासनिक कार्यवाही
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश का जिला अलीगढ एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। अहम वजह इसके नाम को लेकर है, जिसे बदलकर हरिगढ़ किये जाने के प्रस्ताव पर प्रशासनिक कार्यवाही शुरू हो गई है।
दरअसल, अलीगढ़ के जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने का औपचारिक अनुरोध किया था। इस पर संज्ञान लेते हुए राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव सूरज कुमार यादव ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में जिला पंचायत की पहली बैठक में मौजूद जन प्रतिनिधियों ने अलीगढ का नाम बदलकर हरिगढ़ किये जाने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा था। इस बैठक में अलीगढ सभी के सभी विधायको के अलावा स्थानीय सांसद भी मौजूद थे।
इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान भी जिले का नाम अलीगढ़ के स्थान पर हरिगढ़ किये जाने के संदर्भ में प्रस्ताव दिया था।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और शिक्षा के बड़े केंद्र रहे अलीगढ़ का नाम बदलने का इतिहास काफी पुराना रहा है। सदियों से इस शहर की पहचान राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक बदलावों के दौर से गुजरती रही है। हाल ही में शहर का नाम बदलकर ‘हरिगढ़’ करने की चर्चाओं के बीच, आइए जानते हैं कि इतिहास में कब-कब इस शहर के नाम में बदलाव हुए हैं।
‘कोल’ या ‘कोइल’ थी मूल पहचान
18वीं शताब्दी से पहले अलीगढ़ क्षेत्र का मूल नाम ‘कोल’ (Kol) या ‘कोइल’ (Koil) हुआ करता था। प्राचीन ग्रंथों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्थानीय मान्यताओं में इस क्षेत्र को इसी नाम से जाना जाता था। यह नाम आज भी शहर के कुछ पुराने हिस्सों और कोल तहसील के रूप में जीवित है।
साबित खान के दौर में ‘साबितगढ़’
18वीं सदी के शुरुआती दौर में यहाँ के स्थानीय शासक साबित खान ने इस क्षेत्र पर अपना आधिपत्य स्थापित किया और किले के आसपास के इलाके का नाम बदलकर अपने नाम पर ‘साबितगढ़’ रख दिया था, हालांकि यह नाम बहुत लंबे समय तक प्रचलित नहीं रह सका।
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‘साबितगढ़’ से बना ‘अलीगढ़’
18वीं सदी के उत्तरार्ध में (लगभग 1757-1775 के दौरान) यहाँ के शक्तिशाली शासकों और स्थानीय प्रशासकों द्वारा इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किले का और अधिक विकास किया गया। इसी दौरान इसका नाम बदलकर पैगंबर मोहम्मद के दामाद हज़रत अली के नाम पर ‘अलीगढ़’ रख दिया गया। तब से लेकर आज तक आधिकारिक और बोलचाल में यही नाम लगातार चला आ रहा है।
हो सकता है विवाद:
अलीगढ़ का नाम बदलकर हरीगढ़ किये जाने का मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ किये जाने के प्रस्ताव पर अगर सरकार की मुहर लगती है तो नए नाम को लेकर एक विवाद जन्म ले सकता है। अलीगढ़ को हरिगढ़ किये जाने का समर्थन करने वाले इसे शहर की प्राचीन सनातन संस्कृति और मूल पहचान से जुड़ा बताकर इसका समर्थन करेंगे।
वहीं, अलीगढ़ का नाम बदले जाने पर इतिहासकार और विरोधी पक्ष यह कह कर विरोध करे सकते हैं कि अलीगढ़ का पिछले कई सौ वर्षों का एक सुस्थापित इतिहास रहा है और प्रशासनिक बदलावों से शहर की बहुसांस्कृतिक विरासत प्रभावित होती है।
हाल ही में नगर निगम की बैठकों के दौरान भी ‘अलीगढ़ बनाम हरिगढ़’ के प्रस्ताव को लेकर भारी हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिल चुकी है। सदन के भीतर पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी नारेबाजी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि यह मुद्दा जमीन स्तर पर भी कितना संवेदनशील है।
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