नार्को-हवाला सिंडिकेट पर ED का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार: 1,424 बैंक खाते फ्रीज़, 6 गिरफ्तार

नार्को-हवाला सिंडिकेट पर ED का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार: 1,424 बैंक खाते फ्रीज़, 6 गिरफ्तार

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मिजोरम और मणिपुर में ड्रग्स तस्करी और हवाला कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीमों ने 23 अक्टूबर को आइजोल, चम्फाई, लॉन्गत्लाई और चुराचांदपुर में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

यह पूरी कार्रवाई म्यांमार से होने वाली हेरोइन और ब्राउन शुगर जैसी नशीली दवाओं की तस्करी और उससे कमाए गए काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ की गई है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और मिजोरम पुलिस के साथ मिलकर चलाए गए इस ऑपरेशन में ईडी ने नार्को-हवाला से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इसके साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटरों की 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई है, जिससे अब तक जब्त की गई कुल रकम 26 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

छापेमारी के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें तीन मिजोरम से और तीन मणिपुर से हैं। इसके अलावा, नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में पहले से ही न्यायिक हिरासत में बंद चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए मिजोरम की विशेष अदालत में आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

NDPS एक्ट के तहत ED का बड़ा एक्शन

एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने तीन मामलों में जांच शुरू की। ईसीआईआर/एजेडएसजेडओ/05/2025 (कृषिव एंटरप्राइज मामला, मिजोरम) 14.03.2025 को चम्फाई की जोखावथर पुलिस द्वारा 4.722 किलोग्राम हेरोइन (साबुन की 440 टिकिया) जब्त किए जाने से जुड़ा है। इसे म्यांमार के एक सप्लायर के लिए जोखावथर से आइजोल ले जाया जा रहा था।

भारत-म्यांमार की 1,643 किलोमीटर लंबी खुली सीमा का फायदा उठाकर पूर्वोत्तर भारत में एक बड़ा ‘नार्को-हवाला’ नेटवर्क सक्रिय है। म्यांमार के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ से आने वाली हेरोइन और मेथामफेटामाइन टैबलेट्स मिजोरम और मणिपुर के रास्ते देश के अन्य हिस्सों व बांग्लादेश तक सप्लाई की जाती हैं। इसके बदले, नशीली दवाएं बनाने के लिए जरूरी रसायन (जैसे कैफीन एनहाइड्रस) भारत से म्यांमार भेजे जाते हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले करोड़ों रुपये के काले धन को मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा के विभिन्न बैंक खातों के जरिए घुमाकर वापस सीमावर्ती शहरों तक पहुंचाया जाता है, जहाँ से म्यांमार के सप्लायरों को भुगतान किया जाता है।

मार से भारत आने वाले अवैध नशीले पदार्थों (ड्रग्स) और हवाला कारोबार के इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। तस्कर सीमावर्ती इलाकों की छोटी दुकानों और फार्मेसियों के जरिए कैफीन एनहाइड्रस जैसे रसायन म्यांमार भेजते हैं, जहाँ इनका इस्तेमाल ‘याबा’ गोलियां बनाने में होता है।

इसके बदले म्यांमार से हेरोइन और ब्राउन शुगर तियाउ नदी पार कर भारत लाई जाती है और चम्फाई-आइजोल कॉरिडोर के रास्ते पूर्वोत्तर और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है।

शेल कंपनियों से सीमा पार पहुंचा ड्रग्स का पैसा

इस अवैध कारोबार से मिलने वाली करोड़ों रुपये की नकदी को दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरों से हवाला चैनलों और शेल कंपनियों के जरिए वापस सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाया जाता है।

चुराचांदपुर और मिजोरम के विभिन्न खातों में यह पैसा जमा किया जाता है, जिसे बाद में म्यांमार के सप्लायरों को ‘क्यात’ मुद्रा में चुकाया जाता है। जांच एजेंसियों ने इस सिंडिकेट के खुलासे के बाद कई ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और हवाला के सुराग जब्त किए हैं

नार्को-हवाला नेटवर्क में लोगों ने ₹500 के कमीशन पर अपने बैंक खाते ड्रग तस्करों को किराए पर दिए थे। मणिपुर और मिजोरम में नशीले पदार्थों की कमाई इन्हीं खातों से ट्रांसफर हो रही थी।

ईडी ने कार्रवाई करते हुए 1,424 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं और हवाला की कमाई से बना ₹17.82 करोड़ का पांच मंजिला ‘होटल जेटीएस’ कुर्क कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल ₹26 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।