चुनाव आयोग की अंदरूनी जंग अब कोर्ट में: सुप्रीम कोर्ट करेगा मुख्य चुनाव आयुक्त पर फैसला

चुनाव आयोग की अंदरूनी जंग अब कोर्ट में: सुप्रीम कोर्ट करेगा मुख्य चुनाव आयुक्त पर फैसला

नई दिल्ली: चुनाव आयोग के अंदरूनी मतभेदों का हाई-प्रोफाइल विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तौर-तरीकों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। यह कानूनी लड़ाई राकेश कुमार सिंह नाम के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है।

याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि चुनाव आयोग के भीतर लोकतांत्रिक नियमों की अनदेखी की जा रही है।

मुख्य रूप से वोटर लिस्ट की गहन जांच-परख जैसे बेहद संवेदनशील और बड़े फैसले बाकी चुनाव आयुक्तों की मंजूरी या बिना आपसी सहमति के, अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा ही ले लिए गए।

अब अदालत इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या आयोग के भीतर लिए गए ये फैसले संवैधानिक रूप से सही है।

कानून का हवाला देकर घेरे गए मुख्य चुनाव आयुक्त

मंगलवार को वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने सहमति जता दी।

इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार आयोग के कामकाज और फैसले सर्वसम्मति या मतभेद की स्थिति में बहुमत से होने चाहिए।

याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे कम से कम 14 मामलों में आपत्ति दर्ज की थी, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या ये फैसले वास्तव में पूरे आयोग के थे या सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर पर लिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में पश्चिम बंगाल का एक बड़ा मामला भी उठाया गया है, जिसमें वोटर लिस्ट की जांच से जुडी करीब 16 लाख 10 हजार अपीलों का हवाला दिया गया है। ये अपीलों उन मतदाताओं से जुड़ी हैं, जिनके नाम न्यायिक अधिकारियों के आदेश के बाद वोटर लिस्ट में जोड़े गए थे।

याचिकाकर्ता ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शित लाने के लिए अदालत से मांग की है कि चुनाव आयोग के असली कागजात, फाइलों पर लिखे गए नोट और सभी रिकॉर्ड कोर्ट के सामने पेश किए जाएं।

इसके साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में एक SIT या जांच आयोग बनाने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी अपील की गई है कि चुनाव आयोग के सभी डिजिटल और कागजी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए ताकि उनमें कोई फेरबदल न हो सके।


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Mehak B