एंटीबायोटिक का बेअसर होना एक बड़ा खतरा: स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

एंटीबायोटिक का बेअसर होना एक बड़ा खतरा: स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली: एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल अब इंसानी सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बुखार, गले में खराश या पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में लोग जल्दी आराम पाने के चक्कर में बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक खा लेते हैं।

दवाओं के इस गलत और लगातार इस्तेमाल के कारण शरीर में मौजूद बैक्टीरिया पर इन दवाओं का असर तेजी से खत्म हो रहा है।

एक बड़े ऑनलाइन दवा और जांच रिपोर्ट के अध्ययन में करीब 2.57 करोड़ पर्चों (प्रिस्क्रिप्शन) की जांच की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 27.8 लाख पर्चों में एंटीबायोटिक दवाएं लिखी थीं, यानी हर 10 में से 1 मरीज को एंटीबायोटिक दी जा रही थी।

इस रिसर्च में सामने आया है कि इस लापरवाही की वजह से अब बैक्टीरिया पर इन दवाओं का असर लगभग 57 प्रतिशत तक कम हो चुका है, जिसे मेडिकल भाषा में (Antibiotic Resistance) कहते हैं।

2.57 करोड़ पर्चों में से 27.8 लाख में मिली एंटीबायोटिक

ऑनलाइन दवा और जांच के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन में करीब 2.57 करोड़ दवाओं के पर्चों का विश्लेषण किया गया। इनमें लगभग 27.8 लाख पर्चों में एंटीबायोटिक दर्ज थी।

यानी हर 10 में से करीब एक पर्चे में एंटीबायोटिक थी। अध्ययन में सामने आया कि धड़ल्ले से एंटीबायोटिक के यूज से अब इसका असर बैक्टीरिया पर करीब 57 फीसदी तक कम हो गया है।

खासतौर पर पेशाब के संक्रमण से जुड़े ई. कोलाई बैक्टीरिया में सिप्रोफ्लॉक्सासिन में 57 फीसदी और सेफ्ट्रियाक्सोन के खिलाफ 53.6 फीसदी प्रतिरोध मिला।

आईआईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने 2023 से 2025 के टाटा 1एमजी के आंकड़ों का अध्ययन किया। 2.57 करोड़ पर्चों में 27.8 लाख एंटीबायोटिक थीं। 1.55 लाख से अधिक सूक्ष्मजीव नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें 94 फीसदी पेशाब से जुड़े थे।


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Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।