पेपर लीक रोकने पर हो चर्चा, सजा-जुर्माने के प्रावधानों के बीच सीजेपी की पांच प्रमुख मांगें
पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसुतोष रांका ने संसद से पारित विधेयक पर सवाल उठाते हुए सरकार से माँगा की है कि केवल सजा और जुर्माना के प्रावधानो के बजाय परीक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने और लीक को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए
नई दिल्ली: परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक की समस्या को लेकर सियासी बयानबाजियां तेज हैं, और इसी कड़ी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मंगलवार को संसद में पास हुए संशोधित विधेयक पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि केवल सजा और जुर्माने की बात करने के बजाय पेपर लीक को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो जारी कर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम सच में पेपर लीक रोकने की गंभीर कोशिश कर रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: JPC की रिपोर्ट ऐन वक्त पर टली: संसद के मानसून सत्र में सरकार ने क्यों खींचे कदम
सीजेपी नेता ने तर्क दिया कि संसद में पास हुए विधेयक में यह बड़ी खामी है कि सरकार केवल लीक होने के बाद की प्रक्रिया—जैसे फास्ट ट्रैक कोर्ट, सजा या जुर्माने—की बात कर रही है, लेकिन लीक को रोकने के उपायों पर कोई बात नहीं हुई है। जब तक परीक्षा व्यवस्था की जड़ में बदलाव और पूरे तंत्र की शुरू से अंत तक जांच नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।
आशुतोष रांका ने पांच सूत्रीय मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार, परीक्षा कार्यक्रम, कैलेंडर और पाठ्यक्रम में पारदर्शिता, कोचिंग सेंटरों पर लगाम, और डिजिटल जांच की बात नहीं की जाएगी, तब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से बातचीत कर परीक्षा व्यवस्था के ढांचे को मजबूत बनाए।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
