सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने का हाई कोर्ट का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिगड़ते स्वास्थ्य, गिरते हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स के चलते सोनम वांगचुक को सफदरजंग से मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जलवायु एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरते स्वास्थ्य, कम हीमोग्लोबिन और गिरते प्लेटलेट्स के स्तर को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल से गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का बड़ा आदेश दिया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान एम्स और सफदरजंग अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक का हीमोग्लोबिन, वाइट ब्लड सेल (WBC) और प्लेटलेट्स काउंट काफी कम हो गए हैं, जिससे उन्हें किसी भी संक्रमण का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अनशन के कारण शरीर में न्यूट्रिशन की भारी कमी हुई है और उन्हें अस्पताल में निरंतर चिकित्सकीय निगरानी की सख्त जरूरत है।
वांगचुक के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने वांगचुक द्वारा लिखी गई एक चिट्ठी का हवाला दिया, जिसमें सफदरजंग अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी और फोन का उपयोग न करने देने जैसी परेशानियों का उल्लेख किया गया था।
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इस पर कोर्ट ने वांगचुक की चिंताओं को समझते हुए उन्हें उनकी पसंद के निजी अस्पताल मेदांता में शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर सिब्बल ने अपनी सहमति दे दी।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार को वांगचुक को प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि, मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्हें केवल मेदांता के डॉक्टरों की मेडिकल सलाह के आधार पर ही डिस्चार्ज किया जाए, न कि उनकी खुद की इच्छा पर।
उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों और डॉक्टरों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश दिया कि सफदरजंग अस्पताल में हुए इलाज की सभी मेडिकल रिपोर्ट मेदांता के डॉक्टरों को सौंप दी जाएं और आगे का इलाज वहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी रखा जाए।
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