कांग्रेस ने मात्र 5 विधायकों से कैसे पलट दी तमिलनाडु की पूरी राजनीति
नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति की धुरी को पूरी तरह से हिला दिया है।
इस चुनाव में सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ कांग्रेस का वह फैसला रहा, जिसने डीएमके के साथ अपना 20 साल पुराना गठबंधन तोड़कर अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ को समर्थन देने का ऐलान किया।
जब चुनाव नतीजों में विजय की पार्टी 108 सीटों पर सिमट गई और बहुमत के आंकड़े (118) से दूर रह गई, तब कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाते हुए विजय को बिना शर्त समर्थन देने के बजाय सरकार में ‘उचित हिस्सेदारी’ की शर्त पर गठबंधन किया। कांग्रेस के इस दांव ने न केवल डीएमके को सत्ता से बाहर कर दिया, बल्कि विजय के लिए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी साफ कर दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देते हुए इस जीत को ‘सामाजिक न्याय और आत्मसम्मानतमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की छह दशक पुरानी पारंपरिक राजनीति को जड़ से हिला दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ कांग्रेस का रुख रहा, जिसने ऐन मौके पर अपनी पुरानी सहयोगी द्रमुक (DMK) का साथ छोड़कर थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया। चुनाव में विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से पीछे रह गई थी।
ऐसे में कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन ने न केवल विजय के लिए सत्ता की राह आसान की, बल्कि राज्यपाल के साथ चल रहे राजनीतिक गतिरोध को भी खत्म कर दिया। कांग्रेस के इस फैसले के बाद अन्य सहयोगियों जैसे CPI, CPI (M) और VCK ने भी विजय को समर्थन पत्र सौंप दिए, जिससे गठबंधन की संख्या 120 तक पहुंच गई।
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कांग्रेस के इस “पासा पलटने” वाले फैसले पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह सरकार तमिलनाडु की राजनीतिक और सामाजिक चेतना को परिभाषित करने वाले मूल्यों—आत्म-सम्मान, सामाजिक न्याय और तर्कसंगत विचार की जीत है।
उन्होंने विश्वास जताया कि विजय का नेतृत्व समावेशी शासन और लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत करेगा। वहीं, राहुल गांधी ने विजय के शपथ ग्रहण का स्वागत करते हुए इसे ‘नई पीढ़ी, नई आवाज और नई कल्पना’ का उदय बताया।
राहुल ने कहा कि तमिलनाडु के युवाओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और विजय का मुख्यमंत्री बनना राज्य में एक नई और प्रगतिशील राजनीति की शुरुआत है।
इस राजनीतिक उलटफेर के पीछे कांग्रेस की अपनी रणनीति भी रही है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर जैसे नेताओं ने खुले तौर पर कहा कि पिछले गठबंधन में पार्टी को द्रमुक की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसके कारण उन्होंने एक स्वतंत्र रास्ता चुनना बेहतर समझा।
कांग्रेस के इस समर्थन ने तमिलनाडु में द्रमुक-अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने द्विध्रुवीय शासन को समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। विजय ने भी कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पारदर्शी शासन का वादा किया है और राज्य की वित्तीय स्थिति पर जल्द ही ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की घोषणा की है।
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