मंहगाई की मार: कमर्शियल सिलेंडरऔर पेट्रोल-डीजलकी कीमतों में फिर बढ़ोत्तरी

मंहगाई की मार: कमर्शियल सिलेंडरऔर पेट्रोल-डीजलकी कीमतों में फिर बढ़ोत्तरी

कमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से कानपुर के खाद्य उद्योग पर भारी दबाव आ गया है। इसके चलते वैवाहिक आयोजनों में परोसी जाने वाली 700 रुपये की थाली की कीमत बढ़कर अब 900 रुपये हो गई है। अभी तक दाम बढ़ाने से कतरा रहे कैटरर्स ने आखिरकार शनिवार को बढ़े हुए भावों का एलान कर दिया। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल के दामों में भी भारी बढ़ोतरी की बढ़ती।लागत के कारण नए सौदों के रेट तय करने का फैसला फिलहाल पहले सप्ताह तक के लिए टाल दिया गया है।

 

कानपुर। कमर्शियल गैस सिलिंडर के बढ़े दामों का सीधा असर अब आम जनता की जेब पर खाद्य उत्पादों और अन्य जरूरी चीजों की महंगाई के रूप में दिखने लगा है।

कमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत और बढ़ी कीमतों के कारण समोसा, जलेबी और स्ट्रीट फूड वेंडर्स पहले ही दाम बढ़ा चुके हैं, लेकिन अब दादा नगर की फूड इंडस्ट्री के पैकेट बंद माल पर भी मूल्य वृद्धि का जबरदस्त दबाव बन गया है।

स्थानीय उद्यमियों के अनुसार, ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थितियों के कारण गैस संकट खड़ा हुआ था शुरुआत में हालात सामान्य होने की उम्मीद और पैकेजिंग उत्पादों पर पहले से दाम छपे होने के कारण उद्योगों ने कीमतें नहीं बढ़ाई थीं।

लेकिन अब कमर्शियल सिलिंडर की कीमत तीन हजार रुपये से भी अधिक हो जाने के बाद उत्पादों के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी हो गया है।

गैस सिलिंडर की इस महंगाई का सबसे बड़ा और सीधा असर वैवाहिक आयोजनों पर पड़ रहा है।

कानपुर होटल गेस्ट हाउस एसोसिएशन के मुताबिक, जो बुकिंग पहले पुरानी दरों पर हो चुकी थी, उनमें अब तक कैटरर्स और गेस्ट हाउस संचालकों ने सहयोग किया।

मगर अब लागत बढ़ने के कारण वैवाहिक समारोहों में भोजन का प्रबंध नई दरों पर ही किया जाएगा।

राहुल इवेंट्स एंड कैटरर्स के निदेशक अंकित गुप्ता ने बताया कि गैस के दाम बढ़ने से नमकीन से लेकर मिठाई तक की कीमतों में उछाल आया है; खोये की मिठाई के दाम 25 प्रतिशत और अन्य मिठाइयों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिसके कारण शादी-ब्याह की थाली भी अब ₹200 तक महंगी हो गई है।

खाद्य उद्योग के साथ-साथ यह संकट औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित मेटल इकाइयों के लिए भी बड़ा झटका साबित हो रहा है।

धातुओं को काटने, जोड़ने और नए उत्पाद तैयार करने में गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। गैस उपलब्ध न होने या महंगी होने से मशीनों का निर्माण और पुर्जों की मरम्मत का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा, पैकेजिंग और प्रिंटिंग इंडस्ट्री में ड्रायर और अन्य मशीनों को चलाने के लिए गैस का प्रयोग होता है, जिससे अब ऊर्जा की लागत बढ़ जाएगी।

कच्चे माल और प्रोसेसिंग की लागत बढ़ने से एमएसएमई (MSME) इकाइयां अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पर मजबूर हैं, जिसका असर बाजार में चौतरफा महंगाई के रूप में दिखेगा।

बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण जो इकाइयां दाम नहीं बढ़ा पाएंगी, उनके प्रॉफिट मार्जिन में भारी गिरावट आएगी।

फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल का कहना है कि मेटल उद्योग पिछले दो महीनों से गहरे संकट में है और अब गैस पर खर्च बढ़ने से उत्पादों की लागत और अधिक बढ़ जाएगी, जिससे सभी क्षेत्रों में महंगाई का असर दिखेगा।

वहीं, आईआईए के मंडल अध्यक्ष दिनेश बरासिया ने इसे छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए ‘डबल झटका’ बताया है।

उनका कहना है कि ये उद्योग पहले से ही कच्चे माल की ऊंची कीमतों से जूझ रहे थे, और अब इस संकट के कारण कई छोटी इकाइयों को अपना उत्पादन कम करना पड़ सकता है, साथ ही आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक खर्च बढ़ने की भी पूरी आशंका है।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।