सरकारी खजाने में गड़बड़ी ₹9222 करोड़ के सेस और लेवी पर उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली: लोक लेखा समिति PAC के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की अगुवाई में हुई बैठक में एक बड़ा मुद्दा उठाया गया है। समिति ने सरकार द्वारा जनता से सेस उपकर और लेवी के नाम पर वसूले गए भारी-भरकम फंड के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई है।
कैग की रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि 9,222 करोड़ रुपये की राशि सरकार के चार निर्धारित रिजर्व फंडों में ट्रांसफर नहीं की गई।
समिति के सदस्यों ने वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए साफ किया कि करदाताओं मध्यम वर्ग और गरीबों से वसूले जाने वाले पैसे का इस्तेमाल केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए होना चाहिए जिसके लिए वे जुटाए जाते हैं।
सेस और लेवी के ₹3.89 लाख करोड़ का पूरा ट्रांसफर नहीं
कैग की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने सेस और लेवी के जरिए कुल 3,89,220 करोड़ रुपये वसूले, जो कुल टैक्स कमाई का 10.25% है।
हालांकि, ऑडिट जांच में पाया गया कि इस वसूले गए पूरे फंड को तय मदों और रिजर्व फंडों में ट्रांसफर नहीं किया गया।
सबसे बड़ी कमी प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि के मामले में सामने आई जहां 21,085 करोड़ रुपये की कुल वसूली के मुकाबले केवल 14,439 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर किए गए। जिससे 6,646 करोड़ रुपये का अंतर आ गया।
इसके अलावा, आयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट फंड ओआइडीएफ को लेकर भी गंभीर खुलासे हुए हैं। वर्ष 1974-75 से संचयी संग्रह 3,12,782 करोड़ रुपये रहा है।
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लेकिन 1991-92 तक केवल 902 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर किए गए और उसके बाद 2023-24 तक कोई राशि ट्रांसफर नहीं की गई।
ओआईडीएफ फंड में गड़बड़ी
हालांकि 2024-25 में ओआइडीएफ को चालू किया गया, लेकिन आडिट में 201 करोड़ रुपये की कम ट्रांसफर का पता चला और 31 मार्च 2025 तक 2,94,150 करोड़ रुपये भारत की संचित निधि में ही पड़े रहे।
साथ ही, 844.93 करोड़ रुपये के क्रेडिट बैलेंस वाले 10 रिजर्व फंड और 21 डिपाजिट अकाउंट तीन या उससे अधिक वित्तीय वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं।
वहीं वित्त मंत्रालय ने अपनी दलील में कहा है कि स्वास्थ्य और शिक्षा सेस के मामलों में ‘माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा कोष’ को जोड़ने के बाद कुल ट्रांसफर की गई रकम तय आंकड़ों से भी ज़्यादा रही है।
मंत्रालय के मुताबिक सरकार ने नियमों के तहत पूरा पैसा सही जगह भेजा है। समिति इस बात पर अड़ी है कि ऐसे कोषों का इस्तेमाल बजट घाटे को पूरा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
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