जस्टिस शिवगणनम का SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा: बोले- केस निपटाने में लगेंगे 4 साल
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम ने पश्चिम बंगाल के SIR अपीलीय ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के ठीक बाद आया यह इस्तीफा प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जस्टिस शिवगणनम ने अपने इस्तीफे के लिए ‘व्यक्तिगत कारणों’ का हवाला दिया है। हालांकि, इस्तीफे के साथ उन्होंने ट्रिब्यूनल के कामकाज और पेंडिंग मामलों पर कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने बताया कि वर्तमान गति से चलते हुए, कोलकाता के सभी लंबित अपीलों को निपटाने में लगभग 4 साल का समय लग जाएगा।
ट्रिब्यूनल में अभी भी करीब 1 लाख अपीलें लंबित हैं। उन्होंने महज 22 दिनों में 1,777 अपीलों का निपटारा किया, जिसमें एक भी अपील खारिज नहीं की गई। ने बताया कि पोर्टल पर शब्द सीमा के कारण विस्तृत आदेश देने में परेशानी हो रही थी, इसलिए वे छोटे आदेश दे रहे थे।
यह ट्रिब्यूनल उन लोगों की अपीलों की सुनवाई के लिए बनाया गया था, जिनके नाम हालिया विधानसभा चुनावों से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने 19 न्यायाधीशों को इस कार्य के लिए नियुक्त किया था। राज्य में लगभग 90 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जिनमें से 27 लाख लोगों ने इस निष्कासन को चुनौती दी थी।
उन्होंने महान चित्रकार नंदलाल बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी के मतदान अधिकार बहाल किए। मिशनरीज ऑफ चैरिटी की लगभग 30 ननों को मतदान की अनुमति दी, भले ही उनके प्रमाणपत्रों में तकनीकी विसंगतियां थीं। कांग्रेस विधायक मोहम्मद महताब शेख पहले व्यक्ति थे जिनका नाम जस्टिस शिवगणनम की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल ने बहाल किया था।
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