ममता संग सुलह, पर स्टालिन हुए खफा: ‘INDIA’ को लगा दक्षिण से झटका
कोलकाता: विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के भीतर की रार थमने का नाम नहीं ले रही है। जहाँ एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख में नरमी आने से गठबंधन राहत महसूस कर रहा था, वहीं अब दक्षिण से आए झटके ने रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है।
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय (टीवीके प्रमुख) के बढ़ते प्रभाव और उनके हालिया रुख ने गठबंधन के गणित को उलझा दिया है। माना जा रहा है कि विजय की सक्रियता से गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लग सकती है, जिससे डीएमके (DMK) नेतृत्व असहज महसूस कर रहा है।
तमिलनाडु के चुनाव परिणाम ने इंडिया गठबंधन की एकता को खासी चोट पहुंचाई। 234 सीटों वाले विधानसभा में एक्टर विजय की नई नवेली TVK पार्टी ने सभी को चौंकाते हुए 108 सीटों पर जीत हासिल कर लिया, लेकिन यह पूर्व बहुमत के लिहाज से पर्याप्त नहीं रहा। राज्य में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल सका। यही वजह है कि परिणाम आने से पहले TVK ने कांग्रेस से समर्थन मांग लिया।
कांग्रेस ने यहां पर सत्तारुढ़ नेत्र कडगम (DMK) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव के बाद पार्टी ने डीएमके का साथ छोड़कर एक्टर विजय की पार्टी के साथ जाने का ऐलान कर दिया। 5 सीटों वाली कांग्रेस अब विजय के साथ खड़ी हो गई। हालांकि कांग्रेस के इस फैसले से DMK बुरी तरह से नाराज हो गई।
लंबे समय से बनी दोस्ती में दरार आ गई और दोनों के बीच रिश्ते तेजी से नीचे गिरे। DMK की ओर से कांग्रेस पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया गया। इस तरह के आरोप के बाद इंडिया गठबंधन की एकता फिर से बिखरती दिख रही है।
तमिलनाडु से कांग्रेस के लोकसभा सांसद मणिकम टैगोर ने पीठ में छुरा घोंपने के आरोप पर डीएमके पर पलटवार किया और कहा कि इस तरह के आरोप बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के लिए हमेशा त्याग किया है और हमेशा विचारधारा के साथ खड़ी रही है। उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है।
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विरूद्धनगर से लोकसभा सांसद टैगोर ने यह भी कहा कि जनता ने डीएमके के शासन के खिलाफ वोट किया है और सहयोगी होने के कारण कांग्रेस को भी नुकसान उठाना पड़ा है। तमिलनाडु का जनादेश बदलाव के लिए है, विजय की सरकार के लिए है। इस चुनाव के परिणाम से यह भी साबित हुआ है कि राज्य के लोगों ने धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए वोट किया है। डीएमके को अपनी हार स्वीकार कर लेनी चाहिए।
तमिलनाडु की तरह पश्चिम बंगाल में भी चुनाव अप्रत्याशित रहे और यहां पर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस की करारी हार हुई। खुद ममता को भी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की भी स्थिति खराब रही। राहुल गांधी ने यहां के परिणाम की आलोचना और ममता का साथ देते हुए कहा कि असम और बंगाल ऐसे साफ मामले हैं, जहां बीजेपी ने चुनाव आयोग की मदद से चुनाव चुराया है। हम ममता से सहमत हैं कि बंगाल में 100 से अधिक सीटें चुराई गईं।
चुनाव परिणाम के बाद ममता ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस किया तो बीजेपी पर हमला करने के साथ-साथ उन्होंने बार-बार इंडिया गठबंधन का जिक्र किया। तब उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने मुझे बताया कि वे पूरी तरह से उनके साथ हैं। मुझे ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी। इस दौरान उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव के साथ-साथ तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन का भी जिक्र किया कि इन लोगों ने मुझे फोन किया।
हालांकि ममता भले ही शुरू से इंडिया गठबंधन में जुड़ी रही हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में वह एकला चलो की राह पर आ जाती हैं। इस बार भी पश्चिम बंगाल में दोनों दलों ने इंडिया गठबंधन के बैनर पर चुनाव नहीं लड़ा। गठबंधन के सभी घटक दल अपने-अपने स्तर पर चुनाव लड़े। वाम दल भी अकेले ही मैदान में उतरे। ऐसे में इंडिया गठबंधन की एकता इस चुनाव से और भी तार-तार हो गई। ज्यादातर विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के घटक दल अलग-अलग ही चुनाव लड़ते रहे हैं।
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