करूर भगदड़: सीएम विजय को पीड़ितों से मिलने और मुआवजा देने की सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को करूर भगदड़ हादसे के पीड़ितों से मिलकर मुआवजा और नौकरी के पत्र सौंपने से रोकने वाली याचिका को खारिज कर दिया है
नई दिल्ली: तमिलनाडु के करूर में पिछले साल सितंबर में तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) की एक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है।
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जिसके तहत मुख्य विपक्षी दल डीएमके ने मौजूदा टीवीके सरकार और मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी।
याचिका में मांग की गई थी कि मुख्यमंत्री विजय को पीड़ित परिवारों से मिलने, उन्हें 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने और सरकारी नौकरी बांटने के लिए करूर जाने से रोका जाए।
डीएमके का आरोप था कि मुख्यमंत्री के इस कदम से पिछले साल हुए इस भीषण हादसे की चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की इस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी मुख्यमंत्री की प्रशासनिक या सार्वजनिक गतिविधियों को तय नहीं करेगी।
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सुनवाई के दौरान जजों ने डीएमके के वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि वे अदालत को अपनी राजनीतिक लड़ाई का मंच न बनाएं।
कोर्ट ने नसीहत दी कि अगर सत्ताधारी टीवीके के नेता हादसे को लेकर कोई राजनीतिक बयान दे रहे हैं, तो डीएमके भी उसके जवाब में सार्वजनिक बयान जारी कर सकती है, लेकिन यह पूरी लड़ाई अदालत के बाहर लड़ी जानी चाहिए।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो करूर हादसे की गंभीरता को देखते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने शुरुआत में इसकी जांच एक विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी थी।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच का जिम्मा राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों में सौंप दिया, जिसकी निगरानी अदालत की एक विशेष कमेटी कर रही है।
अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद अब मुख्यमंत्री विजय पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें घोषित आर्थिक मदद और नौकरियां सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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