केजरीवाल सुनवाई वीडियो: दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, हटाने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं द्वारा अदालती कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने न केवल इन वीडियो को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं, बल्कि केंद्र सरकार को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है।
न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत अरोड़ा की पीठ वकील वैभव सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केजरीवाल, सिसोदिया, पत्रकार रवीश कुमार और अन्य ने अदालत की कार्यवाही को बिना अनुमति रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के नियमों के तहत अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसे अपलोड करना सख्त रूप से प्रतिबंधित है, जब तक कि पूर्व अनुमति न ली जाए। अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(b)(xi) का भी हवाला दिया, जिसमें प्लेटफॉर्म्स को अवैध सामग्री रोकने के लिए उचित प्रयास करने को कहा गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि कोई लिंक अभी भी मौजूद है तो उसे हटाया जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि ऐसे वीडियो दोबारा सामने आते हैं तो प्लेटफॉर्म्स को सूचना मिलने पर तुरंत उन्हें हटाना होगा और इसकी जानकारी रजिस्ट्रार जनरल को देनी होगी। पीठ ने कहा कि इस तरह की सामग्री के प्रसार से न्यायपालिका की छवि पर असर पड़ता है। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने कहा कि मूल अपलोडर की पहचान करना या ऐसे कंटेंट को स्वतः ब्लॉक करना तकनीकी रूप से कठिन है।
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एक प्लेटफॉर्म की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी दातार ने कहा कि आधिकारिक सूचना मिलने के बाद आपत्तिजनक सामग्री हटा दी गई, लेकिन मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) सेंसर की भूमिका नहीं निभा सकते। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि यह मुद्दा न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा से जुड़ा है और इस पर गंभीर विचार की आवश्यकता है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की गई है। यह मामला पहले मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन न्यायमूर्ति तेजस करिया ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया, जिसके बाद इसे वर्तमान पीठ के समक्ष रखा गया।
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