खरगे की बीजेपी को चुनौती, संसद भंग कर बैलेट पेपर से चुनाव करा लें
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के चुनावी सिस्टम पर बड़ा सवाल उठाते हुए लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओ को तुरंत भंग करने की मांग की है।
उनका आरोप है कि ईवीएम की गड़बड़ियों के कारण मौजूदा सभी चुनाव पूरी तरह अवैध हैं, जिससे प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और देश के सभी मुख्यमंत्री भी गैर-कानूनी बन जाते हैं। खरगे ने लोकतंत्र को बहाल करने के लिए मौजूदा व्यवस्था को खत्म कर बैलेट पेपर के जरिए बिल्कुल नए सिरे से चुनाव कराने की वकालत की है।
चुनावी व्यवस्था पर विस्फोटक वार
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश गैर-कानूनी चुनावों के आधार पर चल रहा है और प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी ‘गैर-कानूनी’ हैं, जिन्हें भंग करके बैलेट पेपर से नए चुनाव कराए जाने चाहिए।
साथ ही उन्होंने ‘ईवीएम’ के कथित गलत इस्तेमाल का भी मुद्दा उठाया और देश के विभिन्न राज्यों में चल रही ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र को कमजोर करने वाला बताया।
जिसके तहत 30 सितंबर को हुई ‘इंडिया गठबंधन’ की बैठक में 20 दलों के नेताओं ने यह सहमति जताई कि यह प्रक्रिया गरीबों, मजदूरों और अल्पसंख्यकों के लिए बेहद नुकसानदेह है और इसके जरिए मतदाताओं के नाम हटाने व फर्जी फॉर्म भरवाने जैसी गड़बड़ियां की जा रही हैं, जिसके खिलाफ विपक्ष पूरे देश में अपना आंदोलन जारी रखेगा।
पुराने नेताओं की दुहाई, वर्तमान पर वार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, नरसिम्हा राव और राजीव गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले के नेताओं ने कभी लोकतंत्र को कमजोर करने वाली कार्रवाई नहीं की, जबकि वर्तमान सरकार द्वारा ‘एसआईआर’ (SIR) का इस्तेमाल कर युवाओं, गरीबों, दलितों और वंचितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और लोगों को छोटी-छोटी गलतियां ठीक कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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खरगे ने 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून की धारा 16 और समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश बताया तथा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सदस्यों द्वारा बार-बार पत्र लिखने के बावजूद उनकी अनदेखी की जा रही है।
जिसके विरोध में विपक्ष लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार आंदोलन कर रहा है, जिसके तहत दिल्ली में शुरुआत हो चुकी है और 6 अक्टूबर को सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे, साथ ही उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराते हुए चेताया कि यदि स्थिति यही रही तो लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने क़ानूनी कार्यवाई की बात पर सख्त नाराजगी जताते हुए दावा किया है कि जब अदालत, कानून और चुनाव आयोग सब सरकार के इशारे पर चल रहे हो, तो न्याय की उम्मीद बेकार है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सीधे आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और वोटिंग मशीनें पूरी तरह सत्ता के नियंत्रण में है जहां मतों तक में हेरफेर लिया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी व्यवस्था को बचाने का अब एक ही रास्ता है कि लोकतांत्रिक तरीके से सबसे पहले मोदी और शाह की सरकार को सत्ता से बेदखल किया जाए।
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