खरगे का सरकार पर निशाना: मेरठ दलित छात्रा हत्याकांड को लेकर यूपी सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए देश में महिलाओं और दलितों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर चिंता जताई है
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक दलित युवती की निर्मम हत्या के मामले में राजनीति लगातार तेज होती जा रही है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस हत्याकांड को लेकर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
इसी कड़ी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश और केंद्र की बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
उन्होंने सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवार की आवाज सुनने और उन्हें ढांढस बंधाने की जगह, न्याय की मांग करने वाले लोगों और विपक्ष के नेताओं को कुचलने तथा उनका दमन करने में लगी हुई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि मेरठ की दलित छात्रा की निर्मम हत्या ने भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार का महिला एवं दलित विरोधी चेहरा एक बार फिर पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।
उन्होंने कहा कि आज जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, तो सरकार उनकी सुध लेने के बजाय इंसाफ की आवाज उठाने वालों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। अपने इस बयान में खरगे ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का विशेष रूप से जिक्र किया।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि साल 2013 से 2024 के बीच देश में महिलाओं के विरुद्ध दर्ज अपराधों में करीब 42.6% और अनुसूचित जातियों (SC) के विरुद्ध अपराधों में करीब 41% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उन्होंने आगे कहा कि देश में हर 2 घंटे 3 मिनट में अनुसूचित जाति की एक महिला के साथ बलात्कार होता है, जिसका सीधा मतलब है कि हर दिन औसतन 12 दलित महिलाओं के साथ ऐसी हैवानियत के मामले दर्ज हो रहे हैं।
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खरगे के मुताबिक, ये सिर्फ कागजी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि बीजेपी शासन में महिलाओं, दलितों और वंचित समाज की लगातार बढ़ती असुरक्षा का जीता-जागता प्रमाण हैं।
योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि जब भी कांग्रेस के नेता पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने और उन्हें सांत्वना देने पहुंचते हैं, तो पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें गिरफ्तार, नजरबंद या लाठियों के दम पर बलपूर्वक रोक दिया जाता है।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर योगी सरकार किस कड़वे सच को छिपाना चाहती है और विपक्ष के लोगों को पीड़ित परिवार से मिलने से क्यों रोका जा रहा है? परिवार की बात सुनकर उन्हें त्वरित न्याय देने की जगह यह पुलिसिया दमन क्यों किया जा रहा है? खरगे ने राज्य में अतीत में हुए कुछ अन्य चर्चित मामलों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हाथरस और उन्नाव की घटनाओं में भी पूरे देश ने देखा था कि किस तरह सरकार ने पीड़ितों की आवाज को दबाने और सत्ता से जुड़े रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश की थी, और अब दुर्भाग्य से मेरठ में भी वही पुराना दमनकारी रवैया दोहराया जा रहा है।
उन्होंने पीड़ित परिवार को लाठियां और नजरबंदी के बजाय तुरंत न्याय देने तथा दोषियों को कठोरतम सजा देने की मांग की। साथ ही चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दलितों, वंचितों और मजलूमों की आवाज का यह उफान जल्द ही बीजेपी की सत्ता के सिंहासन को उखाड़ फेंकेगा।
इस पूरे मामले पर स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिले के टीपीनगर क्षेत्र से बीते 15 मई को लापता हुई 20 वर्षीय दलित युवती का शव 17 मई को रोहटा क्षेत्र से बरामद किया गया था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और मामले के मुख्य आरोपी अंकुश कुमार को अगले ही दिन 18 मई को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा, वारदात से जुड़े साक्ष्य (सबूत) छिपाने के आरोप में एक अन्य सह-आरोपी को भी सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है और अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा चुकी है, ताकि मामले की हर कड़ी को साफ किया जा सके।
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