सुप्रिया सुले का आरोप: महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं के साथ छल किया

सुप्रिया सुले का आरोप: महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं के साथ छल किया

यह एक विचित्र स्थिति है कि सरकार ने चुनाव के दौरान बिना किसी तैयारी के जल्दबाजी में इस योजना को लागू कर दिया और अब लगभग डेढ़ साल बाद उसे पता चला है कि 80 लाख महिलाएं इसके तहत अपात्र हैं

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर महिलाओं के साथ छल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि लाडकी बहिन योजना में 80 लाख महिलाओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

सुप्रिया सुले ने कहा कि “लाडकी बहन योजना के तहत 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया है। यह एक विचित्र स्थिति है कि सरकार ने चुनाव के दौरान बिना किसी तैयारी के जल्दबाजी में इस योजना को लागू कर दिया और अब लगभग डेढ़ साल बाद उसे पता चला है कि 80 लाख महिलाएं इसके तहत अपात्र हैं। यह सरकार की राजनीतिक, प्रशासनिक और कार्यान्वयन संबंधी सामूहिक विफलता है।”

सोशल साइट एक्स अपने पोस्ट में सुप्रिया सुले ने कहा, “यह योजना जनता की मेहनत से जुटाए गए कर के पैसे से चलाई जाती है। संक्षेप में, सवाल उठता है कि क्या यह सरकार पिछले डेढ़ साल से अपात्र लाभार्थियों को जनता का पैसा बांट रही थी? यह पूरा मामला इस सरकार की घोर विफलता को उजागर करता है।”

उन्होंने कहा कि यह ऐसी सरकार नहीं है जो अपने वादे निभाती हो। इससे स्पष्ट है कि उन्होंने चुनावी लाभ की उम्मीद में महिलाओं को झूठे प्रलोभन दिए। 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित करके इस सरकार ने राज्य की महिलाओं के भरोसे को धोखा दिया है।

सुले ने कहा कि 80 लाख का यह आंकड़ा छोटा नहीं है। हमारा मानना ​​है कि महाराष्ट्र की हर महिला को ‘लड़की बहन’ योजना के लाभों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर केवाईसी (पहचान और पहचान) पूरा करने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि राज्य की कोई भी पात्र महिला केवाईसी पूरा करने का निरंतर अवसर प्रदान करके इस योजना से वंचित न रहे।

वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने फर्जीवाड़ा रोकने और केवल वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए बेहद कड़े कदम उठाए हैं। 80 लाख फॉर्म निरस्त होने के पीछे कई कारण बताये गए हैं। इनमे लाभार्थी महिला के परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक होना, आधार कार्ड और बैंक खाते में लाभार्थी के नाम में अंतर् होना, बैंक खाते से आधार का लिंक न होना तथा निवास प्रमाणपत्र न होना बताया गया है।

यह मामला प्रकाश में आने के बाद विपक्ष महायुति सरकार को घेर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल ने चुनाव में वोट पाने के लिए ये योजना शुरू की थी और सरकार बनने के बाद लाभार्थियों पर कैची चलाना शुरू कर दिया।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।