ममता बनर्जी बनाम ED: साक्ष्य हटाने के आरोपों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

ममता बनर्जी बनाम ED: साक्ष्य हटाने के आरोपों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट आज ईडी की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें ममता बनर्जी पर I-PAC छापे के दौरान जांच में हस्तक्षेप और सबूत हटाने के आरोप हैं। ईडी का दावा है कि जनवरी में छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और लैपटॉप, मोबाइल व दस्तावेज हटवाए।

मामले की शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी, जब ईडी ने कथित बहु-करोड़ रुपये के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी का आरोप है कि छापे के दौरान ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ I-PAC कार्यालय तथा इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं।

ED का दावा है कि जनवरी में जब टीम I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गई थीं।

एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में छापेमारी स्थल से महत्वपूर्ण डिजिटल और भौतिक साक्ष्य हटाए गए ED के अनुसार, मौके से लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब कर दिए गए, जो जाँच के लिए बेहद जरूरी थेयाचिका में कहा गया है कि राज्य के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह का हस्तक्षेप केंद्रीय एजेंसी की निष्पक्ष जाँच प्रक्रिया को बाधित करता है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ED ने चुनावी रणनीतियों से जुड़ी संस्था I-PAC के कार्यालयों पर दबिश दी थी। ED का तर्क है कि वह भ्रष्टाचार के एक मामले में कड़ी से कड़ी जोड़ रही थी, लेकिन राज्य प्रशासन के दखल ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया।

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सीबीआई से जांच कराने, मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि अगर केंद्रीय जांच एजेंसियों के अभियानों को शारीरिक रूप से रोका जाए तो उन्हें बेबस नहीं छोड़ा जा सकता।

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया है। राज्य सरकार का तर्क है कि ईडी एक सरकारी विभाग है, इसलिए वह मौलिक अधिकारों का दावा करते हुए सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।