गुरु कांशीराम से पहले संसद पहुंची शिष्या मायावती: आईएएस की तैयारी से बसपा सुप्रीमो बनने का सफर

गुरु कांशीराम से पहले संसद पहुंची शिष्या मायावती: आईएएस की तैयारी से बसपा सुप्रीमो बनने का सफर

नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी के इतिहास में मौजूदा समय को सबसे चुनौतीपूर्ण दौर माना जा रहा है, क्योंकि हाल के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन इसके गठन के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बसपा की इस राजनीतिक स्थिति के बीच, इसकी स्थापना और विकास की कहानी बेहद दिलचस्प रही है।

इस सफर की शुरुआत तब हुई जब कांशीराम के मिशन और सिद्धांतो से प्रभावित होकर मायावती उनके साथ जुडी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हुई।

शुरुआती जीवन और जातिगत संघर्ष

1956 में दिल्ली के एक गरीब दलित परिवार में जन्मीं मायावती का बचपन से ही जाति व्यवस्था के कड़े अनुभवों से सामना हुआ, जिसने उन्हें समाज सुधार और राजनीति की ओर प्रेरित किया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई और बीएड के बाद उन्होंने स्कूल में पढ़ाने के साथ आईएएस बनने का सपना देखा, लेकिन 1977 में दिल्ली के एक कार्यक्रम में उनके बेबाक और ओजस्वी भाषण ने कांशीराम का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

कांशीराम ने उन्हें प्रशासनिक सेवा के बजाय राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद मायावती ने अपने पिता की अनिच्छा के बावजूद घर छोड़ दिया और कांशीराम के बामसेफ तथा डीएस-4 जैसे संगठनों के जरिए राजनीति में सक्रिय रूप से कदम रखा।

कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना की और मायावती को मुजफ्फरनगर की कैराना सीट से चुनावी मैदान में उतारा, जिससे उनके औपचारिक राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई।

बसपा का विस्तार और राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा

शुरुआती चुनावों में हार के बावजूद मायावती और बसपा का जनाधार लगातार बढ़ता गया, और अंततः 1989 के लोकसभा चुनाव में मायावती ने बिजनौर सीट से शानदार जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया, जो न केवल उनके राजनीतिक जीवन का एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि बहुजन राजनीति के इतिहास में भी एक ऐतिहासिक मोड़ बन गया।

बहुजन समाज पार्टी के शुरूआती दौर में इसके संस्थापक कांशीराम से पहले ही उनकी शिष्या मायावती को चुनावी जीत हासिल हो गई थी। उत्तर प्रदेश और पंजाब में पार्टी को मिलती बड़ी सफलता को देखते हुए बसपा ने मुख्य रूप से इन दोनों राज्यों पर अपना पूरा ध्यान लगाया।

हालांकि, केवल यहीं तक सीमित न रहकर बसपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़े और वहां सीटें जीतीं। अलग-अलग राज्यों में लगातार शानदार प्रदर्शन और वोट शेयर हासिल करने के बाद ही चुनाव आयोग की ओर से बसपा को एक राष्ट्रीय पार्टी की आधिकारिक पहचान मिली।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं