नीट पेपर लीक: प्रदर्शनकारियों पर सख्त केंद्र, बातचीत का कोई न्योता नहीं
नीट पेपर लीक पर मैराथन बैठक के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत का बुलावा देने से इनकार करते हुए कहा कि विपक्षी फूट के चलते यह आंदोलन जल्द ही स्वतः खत्म हो जाएगा
नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले को लेकर सड़क से लेकर संसद तक मचे बवाल के बीच सरकार के भीतर दिनभर बैठकों का दौर जारी रहा।
आंदोलन के लंबे समय बाद कॉकरोच पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल की स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात तो हुई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि इस बैठक का प्रस्ताव आंदोलनकारियों की ओर से ही आया था। एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार, न तो सरकार ने उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित किया था और न ही कोई आश्वासन दिया है।
सोमवार को संसद भवन स्थित गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय में दिनभर सियासी सरगर्मी बनी रही। शाह की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ लगभग साढ़े तीन घंटे तक मैराथन बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और किरेन रिजिजू भी शामिल हुए।
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बैठक के बाद सरकार की ओर से सतर्कता बरतने और ‘इंतजार करो’ की रणनीति का संकेत मिला। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोग राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, जबकि असली छात्र आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त हैं।
इस दौरान खुफिया एजेंसी (आईबी) प्रमुख की गृह सचिव के साथ भी बैठक हुई, जिससे पता चलता है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद केंद्र सरकार आंदोलन के देशव्यापी असर को लेकर सतर्क है।
दूसरी ओर, आंदोलन में कथित फूट और प्रदर्शन स्थल पर जुटी भीड़ को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी की मौजूदगी के कारण कांग्रेस ने धरनास्थल से दूरी बनाए रखी।
इसके अलावा, वांगचुक को हटाए जाने के बाद भूख हड़ताल शुरू करने वाले कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा अचानक फैसला वापस लेने और सोनम वांगचुक की मांगों में शिक्षा मंत्री को हटाने का सीधा जिक्र न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि विपक्ष के बिखराव और आपसी मतभेदों के चलते यह आंदोलन एक-दो दिनों में खुद-ब-खुद धीमा पड़ जाएगा।
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