परंदूर एयरपोर्ट का प्रोजेक्ट रुका: किसानो के विरोध के बाद CM विजय का बड़ा फैसला
नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में बड़ा एलान करते हुए परंदूर में बनने वाले नए एयरपोर्ट के काम को रोकने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कहा की इस हवाई अड्डा परियोजना से किसानो की उपजाऊ खेती वाली जमीन और स्थानीय निवासियों की रोजी रोटी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा था। जनता और किसानो के कड़े विरोध को देखते हुए सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए उठाए जा रहे सभी कदमो को तुरंत प्रभाव से रोकने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट की सालाना क्षमता करीब तीन करोड़ यात्रियों को संभालने की है, लेकिन शहर की बढ़ती जरूरतों, औद्योगिक विकास और माल ढुलाई में वृद्धि को देखते हुए नए एयरपोर्ट की आवश्यकता है, बशर्ते इसके लिए ऐसी जगह चुनी जाए जहां कृषि भूमि और रिहायशी इलाकों पर न्यूनतम असर पड़े।
मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट किया कि
उन्होंने बताया कि वह परंदूर और आसपास के 12 गांवों में प्रस्तावित एयरपोर्ट के निर्माण का विरोध कर रहे लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए उनकी कृषि भूमि बचाने के समर्थन में हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह औद्योगिक विकास और उसमें एयरपोर्ट की भूमिका के पक्ष में हैं, लेकिन परंदूर के बजाय कोई वैकल्पिक जगह तलाशी जानी चाहिए, जिससे कृषि भूमि और लोगों की आजीविका कम से कम प्रभावित हो।
इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद परंदूर में नया एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों को उनकी सरकार वापस लेगी।
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दूसरी ओर, कांचीपुरम जिले में अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट स्थापित करने के इस प्रस्ताव को पहले ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जबकि तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके नेता थंगम थेन्नारसु ने राज्य के आर्थिक विकास और चेन्नई में एयरपोर्ट की घटती रैंकिंग का हवाला देते हुए नए एयरपोर्ट की जरूरत पर जोर दिया है।
वित् मंत्री थंगम थेन्नारसु ने बताया की चेन्नई और तमिलनाडु की जरूरतों को देखते हुए ही परंदूर को नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए चुना गया था। उन्होंने साफ़ किया की श्रीपेरंबदूर के बड़े औद्योगिक क्षेत्र को पास होने के कारण फायदा पहुंचने के लिए यह जगह तय की गई थी। थेन्नारसु के अनुसार परंदूर का नाम फ़ाइनल करने से पहले कई जगहों की मिट्टी मौसम और तकनिकी जांच की गई थी और इसके लिए केंद्र सरकार से भी सभी जरुरी मंजूरियां ले ली गई थी।
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