पंजाब कांग्रेस की कलह शांत करने में सफल रहे भूपेश बघेल,तल्खी के बाद बैकफुट पर आए चन्नी

पंजाब कांग्रेस की कलह शांत करने में सफल रहे भूपेश बघेल,तल्खी के बाद बैकफुट पर आए चन्नी

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहा घमासान अब थमता हुआ नजर आ रहा है। पार्टी आलाकमान के सख्त रुख के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से लोकसभा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के तेवर ढीले पड़ गए हैं।

अंदरूनी कलह और गुटबाजी की खबरों के बीच चन्नी ने अपने रुख में नरमी लाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी रणनीति को लेकर आलाकमान जो भी फैसला करेगा, पूरा संगठन एकजुट होकर उसके साथ चलेगा।

सुलह के पहले संकेत देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने राहुल गांधी को अपना सर्वमान्य नेता बताया। चन्नी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “विधानसभा चुनाव में अभी करीब सात महीने का समय बाकी है। पार्टी हाईकमान जो भी रणनीति तैयार करेगा, हम सभी मिलकर उसी के मुताबिक काम करेंगे और मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।”

प्रभारी भूपेश बघेल की दोटूक– ‘हाईकमान पर दबाव की राजनीति नहीं चलेगी’

चन्नी का यह बयान पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस सख्त संदेश के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी आलाकमान पर किसी भी तरह का दबाव काम नहीं करता। तीन दिनों से पंजाब के दौरे पर आए बघेल ने बागी सुर अपना रहे नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए कहा था, “एक बार जब हाईकमान कोई फैसला ले लेता है, तो उसे बदला नहीं जाता। क्या यह कोई ‘गुड्डा-गुड़िया का खेल’ है?”

बघेल ने यह भी साफ किया था कि वे नाराज नेताओं से बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं और उनके घर जाकर चाय पीने में भी उन्हें कोई गुरेज नहीं है, लेकिन फैसलों में बदलाव दबाव में आकर नहीं होगा।

पंजाब कांग्रेस में यह पूरा विवाद संगठन और आगामी चुनाव समितियों के पुनर्गठन के बाद शुरू हुआ था। आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बरकरार रखा, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को सिर्फ इलेक्शन कैंपेन कमेटी (चुनाव अभियान समिति) का अध्यक्ष बनाया गया।

इस फैसले से चन्नी और उनके समर्थक बेहद असहज थे। चन्नी समर्थकों का मानना था कि तीन सदस्यीय केंद्रीय पर्यवेक्षक समिति (अजय माकन पैनल) की रिपोर्ट में भी चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी, क्योंकि वह राज्य में सबसे लोकप्रिय दलित चेहरा हैं।

अपनी अनदेखी से नाराज होकर चन्नी ने मोहाली और मोरिंडा में अपने आवास पर करीब 60 से अधिक पूर्व और वर्तमान विधायकों, सांसदों और दिग्गज नेताओं की बैठक बुलाकर शक्ति प्रदर्शन किया था, जिसे आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा गया।

चन्नी के नरम पड़ते ही अब पंजाब कांग्रेस के भीतर बैक-चैनल बातचीत और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने भी लचीला रुख अपनाते हुए कहा कि वे खुद सभी वरिष्ठ नेताओं के घर जाकर उनसे मुलाकात करेंगे और अगर किसी को उनसे कोई शिकायत है, तो उसे दूर करने का हर संभव प्रयास करेंगे।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।