ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में दावा: RBI ने गुपचुप बेच दिया एक लाख करोड़ का सोना

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में दावा: RBI ने गुपचुप बेच दिया एक लाख करोड़ का सोना

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक ताजा विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचे भूचाल के बीच गुपचुप तरीके से अपने सुरक्षित भंडार से लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये का सोना बेच दिया है

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर तेजी से होता असर अब दिखाई देने लगा है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स (Bloomberg Economics) की एक ताजा विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचे भूचाल के बीच गुपचुप तरीके से अपने सुरक्षित भंडार से लगभग 12 बिलियन डॉलर (यानी करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये) का सोना बेच दिया है।

ब्लूमबर्ग के वरिष्ठ भारतीय अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी कवायद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर रहे भारतीय रुपये (Rupee) को संभालने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को लिक्विड रखने के लिए की गई है। इस खुलासे को लेकर अभी तक भारत सरकार, वित्त मंत्रालय या भारतीय रिज़र्व बैंक की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।

आखिर क्यों RBI को बेचना पड़ा 1.14 लाख करोड़ का सोना?

Public Domain में उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स ने इस सोने की बिक्री के पीछे निम्नलिखित 4 प्रमुख और गंभीर आर्थिक कारण बताए हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें:

मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जिससे देश का व्यापार घाटा और डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है।

ऐतिहासिक निचले स्तर पर रुपया:

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसे निकालने (Capital Outflow) के कारण रुपया भारी दबाव में है। हाल ही में डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के पार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिसे थामने के लिए डॉलर की भारी लिक्विडिटी जरूरी थी।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 22 मई को समाप्त हुए दो हफ्तों के डेटा से पता चलता है कि जहां एक तरफ सोने के भंडार में कमी आई, वहीं आरबीआई के विदेशी मुद्रा एसेट्स (FCA) में करीब 7.5 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। यह साफ संकेत देता है कि आरबीआई ने संकट के समय तत्काल इस्तेमाल होने वाली कैश करेंसी (डॉलर) को प्राथमिकता दी है।

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बावजूद वैल्यू घटना: रिपोर्ट में सबसे तकनीकी बिंदु यह उठाया गया कि हाल ही में भारत सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाया गया था। नियम के मुताबिक इससे आरबीआई के पास रखे सोने की वैल्यू बढ़नी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत कुल वैल्यू में गिरावट दर्ज की गई, जो केवल तभी संभव है जब सोने की वास्तविक मात्रा (मात्रात्मक बिक्री) कम की गई हो।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए केवल विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप तक ही सीमित नहीं हैं। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि रुपये को और अधिक टूटने से बचाने तथा विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आरबीआई आगामी 5 जून को होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों (Interest Rates) में बढ़ोतरी का बड़ा फैसला भी ले सकता है।

आरबीआई के पास मार्च के अंत तक कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना मौजूद था, जिसमें से देश की सुरक्षा के मद्देनजर लगभग 77 फीसदी हिस्सा भारतीय तटों (घरेलू तिजोरियों) में वापस लाया जा चुका है। हालांकि, इस ताजा रिपोर्ट और सोने की बिक्री के अनुमानों पर अब तक रिजर्व बैंक की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन जारी नहीं किया गया है।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।