गहराई से समझिये: ईरान-अमेरिका के बीच दो सप्ताह का युद्ध विराम, क्या हुई डील
नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। ईरान और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत के बाद आख़िरकार युद्ध विराम का एलान हो गया, लेकिन ईरान को तबाह करने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्यों झुकने को मजबूर हुए। आइये गहराई से समझते हैं पूरी डील।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को धमकी दी थी कई यदि ईरान ने मंगलवार रात तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोलता तो भीषण बमबारी करके ईरान की वर्षो पुरानी सभ्यता को तबाह कर दिया जायेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों सहित अहम् ठिकानो पर बमबारी करने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद ईरान ने उनकी धमकियों को कोई अहमियत नहीं दी।
अमेरिकी हमलो की संभावना के मद्देनज़र ईरान ने अपने सूइसाइड ड्रोन तैयार कर दिए जिनकी स्पीड करीब 550 किलोमीटर प्रति घंटा है और जो खाड़ी देशो से लेकर इज़राइल तक अचूक निशानों के साथ भारी तबाही मचाने में सक्षम हैं।
अब अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यही थी कि वे यदि ईरान के नागरिक और ऊर्जा ठिकानो पर बमबारी करते हैं तो ब्रिटेन सहित कई देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस कार्रवाई को युद्ध अपराध घोषित करने की मांग लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटा सकते थे।
इसके अलावा अमेरिका में मानवाधिकार संगठन ट्रंप की इस कार्रवाई के खिलाफ अंतराष्ट्रीय कोर्ट भी जा सकते थे। अब ट्रंप एक ऐसी मुश्किल में फंस चुके थे कि न उन्हें झुकने के अलावा कोई रास्ता ही समझ नहीं आ रहा था।
ईरान ने युद्ध विराम के लिए अमेरिका के समक्ष दस शर्तें रखीं थीं। अंततः ट्रंप को ईरान की सभी दस शर्तें स्वीकार करनी पड़ीं। जो नीचे दी गई हैं।
1-प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना: ईरान की पहली और सबसे बड़ी शर्त है कि उस पर लगाए गए सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को तुरंत और पूरी तरह से हटाया जाए।
2-यूरेनियम संवर्धन का अधिकार: ईरान चाहता है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों (जैसे बिजली और चिकित्सा) के लिए यूरेनियम संवर्धन करने का अधिकार मिले और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे मान्यता दे।
3-संपत्ति को अनफ्रीज करना: विदेशों में जमी हुई ईरानी संपत्तियों और फंड को बिना किसी देरी के वापस किया जाए।
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4-सैनिकों की वापसी: ईरान की मांग है कि अमेरिका मध्य पूर्व (Middle East) क्षेत्र से अपनी सैन्य उपस्थिति को कम करे।
5-क्षेत्रीय हस्तक्षेप पर रोक: अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के आंतरिक मामलों या उसके प्रभाव वाले पड़ोसी देशों के मामलों में हस्तक्षेप न करें।
6-सुरक्षा गारंटी: अमेरिका यह लिखित गारंटी दे कि वह भविष्य में ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला नहीं करेगा।
7-हॉर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन: ईरान इस जलमार्ग की सुरक्षा और प्रबंधन में अपनी प्रमुख भूमिका को बरकरार रखना चाहता है।
8-इजरायल पर दबाव: ईरान चाहता है कि अमेरिका इजरायल को गाजा और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए मजबूर करे।
9-राजनयिक मान्यता: ईरान के साथ एक समान संप्रभु राष्ट्र के रूप में व्यवहार किया जाए और परमाणु समझौते (JCPOA) को नए सिरे से या बेहतर शर्तों के साथ बहाल किया जाए।
10-आतंकवाद के आरोपों पर सफाई: ईरान के खिलाफ लगाए गए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आरोपों और सूचियों से उसका नाम हटाया जाए।
इस सौदे में पाकिस्तान ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के बीच मध्यस्थ के रूप में काम किया। रूस और चीन ने भी इस कदम का स्वागत किया है, जबकि भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी बताया है।
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