राम दान पर डाका: जमीन-निर्माण छोड़ सिर्फ चढ़ावा चोरी और लापरवाही की जांच में जुटी SIT

राम दान पर डाका: जमीन-निर्माण छोड़ सिर्फ चढ़ावा चोरी और लापरवाही की जांच में जुटी SIT

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के साथ लापरवाही और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही एसआईटी ने अपने दायरे को सीमित रखते हुए जमीन खरीद-फरोख्त और कमीशनखोरी की शिकायतों को तफ्तीश में शामिल नहीं किया है

 

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की विस्तृत जांच रिपोर्ट अपने अंतिम चरण में है, जिसे आगामी 15 जुलाई को शासन को सौंपा जाएगा। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन की सदस्यता वाली इस एसआईटी का गठन चोरी का मामला उजागर होने के बाद 13 जून को किया गया था।

एसआईटी ने अपनी जांच को केवल चढ़ावा चोरी और ट्रस्ट के फेल हुए निगरानी तंत्र तक ही सीमित रखा है, क्योंकि शासन से उसे इसी बात के निर्देश मिले थे। जमीन की खरीद-फरोख्त में धांधली और निर्माण कार्य में 40 फीसदी कमीशन लेने संबंधी जैसी अन्य शिकायतों को इस मुख्य जांच के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।

इन अतिरिक्त शिकायतों की जांच न करने की एक वजह यह भी है कि जमीन संबंधी आरोपों की जांच के लिए तीन साल पहले गठित राधेश्याम मिश्रा कमेटी की जांच अभी जारी है। हालांकि, एसआईटी को आप सांसद संजय सिंह व अन्य माध्यमों से जो भी शिकायतें और दस्तावेज मिले हैं, उनकी एक अलग रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है, जिस पर आगे की कार्रवाई का फैसला शासन ही करेगा।

इससे पहले 23 जून को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी, आरोपियों की पहचान की गई थी और ट्रस्ट के दो पदाधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा था। अब आने वाली विस्तृत रिपोर्ट में पहले के मुकाबले 10 से 15 फीसदी नई बातें, लापरवाही बरतने वालों की भूमिका और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम सिफारिशें शामिल होंगी।

इस बीच, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को कार्यदायी संस्थाओं एलएंडटी, टाटा, राजकीय निर्माण निगम और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधियों के साथ निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक की।

उन्होंने चढ़ावा चोरी प्रकरण को एक ‘कलंक’ बताते हुए भरोसा जताया कि व्यवस्थाओं में सुधार होगा और ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मंदिर निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और 30 जुलाई तक इसे काफी हद तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद केवल चार किलोमीटर लंबी परकोटा (बाउंड्रीवॉल) का काम बचेगा, जिसे 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।

इसके अलावा, परिसर के बाहर बन रहा ऑडिटोरियम नवंबर-दिसंबर तक तैयार हो जाएगा और राम कथा संग्रहालय की 20 गैलरियों की स्टोरीलाइन तैयार होने के बाद अब उसके डिजिटल व वीडियो कंटेंट पर काम चल रहा है।

चोरी की घटना के बाद मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे की एक तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित की गई है।

यह कमेटी जल्द ही ऑनलाइन बैठक कर आवेदन प्रक्रिया और चयन के करीब 10 प्रमुख मापदंड तय करेगी। अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन की चुनौतियों को देखते हुए सीईओ का चयन सिर्फ प्रशासनिक अनुभव के आधार पर नहीं होगा, बल्कि उम्मीदवार की वित्तीय प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन क्षमता के साथ-साथ उसकी ईमानदारी, धार्मिक आस्था और चरित्र सत्यापन को भी परखा जाएगा।

कमेटी द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए नामों को ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा और आगामी 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इस चयन प्रक्रिया की प्रगति या संभावित नामों पर चर्चा हो सकती है, जिसके बाद सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं