SC का कड़ा रुख: ‘जमानत नियम, जेल अपवाद’ के बावजूद सोनम की जमानत रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने ‘जमानत नियम और जेल अपवाद’ का संज्ञान लेते हुए भी मामले की गंभीरता और सबूतों के आधार पर सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर उन्हें 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को रद्द कर दिया है और उन्हें तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
इससे पहले अप्रैल में मेघालय की निचली अदालत और जुलाई में मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम की जमानत को बरकरार रखा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि यद्यपि ‘जमानत नियम है और जेल अपवाद’ के सिद्धांत से अदालत पूरी तरह वाकिफ है, लेकिन मामले के मेरिट को देखते हुए जमानत रद्द की जा रही है।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कोई खामी नहीं थी और आरोपी को गिरफ्तारी के कारण व संबंधित दस्तावेज पहले ही सौंपे जा चुके थे। इसके अलावा, हत्या के बाद आरोपी के गायब होने का कोई उचित कारण सामने नहीं आया था, ऐसे में वे मेरिट के आधार पर जमानत की हकदार नहीं हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में ट्रायल शुरू हो चुका है और इस चरण पर आरोपी को जमानत पर बाहर रखने से सुनवाई में बाधा आ सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आगामी 6 महीनों के भीतर मुकदमे की सुनवाई आगे नहीं बढ़ती या पूरी नहीं होती, तो आरोपी नई जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ‘जमानत नियम और जेल अपवाद’ के 1977 के ऐतिहासिक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा था कि हाईकोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं की बाढ़ से बचना चाहिए।
लेकिन सोनम रघुवंशी मामले में गंभीर आरोपों, साक्ष्यों और पूर्व में खारिज हो चुकी अर्जियों को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने modern दौर में टूटते रिश्तों और न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम के डिप्रेशन व अविश्वास पर भी चिंता जताई।
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