बंगाल सरकार को झटका: मिलन प्रधान की जमानत पर सोमवार को सुनवाई
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसके तहत मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने और प्रचार करने के लिए कोर्ट से अंतरिम राहत जमानत मिली थी।
जल्द सुनवाई की मांग
इस मामले को बुधवार को देश के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने पेश किया गया। पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत से इस संवेदनशील मामले पर तुरंत और जल्द सुनवाई करने की मांग की है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि हत्या (धारा 302) के आरोपी मिलन प्रधान को चुनाव के लिए जमानत मिली है। चूंकि नंदीग्राम में सोमवार को मतदान है, इसलिए चुनाव से पहले गुरुवार को ही इस पर सुनवाई जरूरी है।
CJI सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का बोर्ड पहले से काफी लंबा है और मामले को सोमवार को सूचीबद्ध किया जाएगा। तुषार मेहता ने फिर गुरुवार को सुनवाई की मांग की। इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई सोमवार को ही होगी।
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सुप्रीम कोर्ट से बंगाल सरकार को झटका
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि कोर्ट इस मामले को खारिज करेगा, लेकिन सोमवार को। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए मिलान प्रधान को 21 अक्टूबर तक तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी।
प्रधान को साल 2007 के आंदोलन से जुड़े 19 साल पुराने अपरधीक मामलो में नामांकन के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसकी जांच सीबीआई कर चुकी है।
अब राज्य सरकार की चुनौती याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा गौरतलब है कि नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होना है
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