शाह का बंगाल दौरा: यूसीसी और सुरक्षा वादों पर बरसे गृह मंत्री
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखी और राज्य की बीजेपी सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समिति के गठन सहित कई चुनावी वादों को पूरा करने की घोषणा की
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने राज्य की बीजेपी सरकार की नीतिगत पहलों को डॉ. मुखर्जी की वैचारिक विरासत का विस्तार बताया और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फुट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखी।
शाह ने कहा कि गत 63 सालों से डॉ. मुखर्जी के योगदान को भुलाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन उनके गृह राज्य में यह प्रतिमा लगाना उन्हें एक उचित श्रद्धांजलि है।
उन्होंने रेखांकित किया कि मुखर्जी द्वारा शुरू किया गया राजनीतिक आंदोलन आज बीजेपी के रूप में देश के दो-तिहाई से ज्यादा भौगोलिक क्षेत्र और आबादी में शासन-व्यवस्था को आकार दे रहा है।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में ‘सोनार बांग्ला’ का दृष्टिकोण साकार हो रहा है और सरकार अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा कर रही है।
उन्होंने घोषणा की कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक समिति का गठन कर दिया गया है।
इसके साथ ही उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जैसा उन्होंने वादा किया था कि गुंडों को उल्टा लटका कर सीधा करेंगे, सरकार वही काम कर रही है।
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर उन्होंने हाल ही में विधानसभा से पारित हुए ‘पश्चिम बंगाल असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश (संशोधन) विधेयक-2026’ का भी उल्लेख किया और इसे अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की दिशा में पहला कदम बताया।
गृह मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि राज्य में घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि हाल ही में गठित ‘दुर्गा सुरक्षा दस्ता’ से पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा मजबूत होगी।
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इसके अलावा, शाह ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत अर्हता रखने वाले शरणार्थियों को जल्द से जल्द नागरिकता देने की बीजेपी की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार होने के कारण नागरिकता देने की बाकी औपचारिकताएं भी बहुत जल्द पूरी कर ली जाएंगी।
अमित शाह के भाषण का एक बड़ा हिस्सा नेहरू-लियाकत समझौते को लेकर आजाद भारत की पहली कैबिनेट से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस्तीफे पर केंद्रित रहा। शाह ने इसे एक भावुक दिन बताते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर को भारत के साथ एकीकृत करने के लिए अपनी जान दे दी थी।
उन्होंने नेहरू-लियाकत समझौते को एकतरफा और पूर्वी पाकिस्तान में रह गए हिंदुओं के साथ अन्यायपूर्ण करार दिया, क्योंकि इसमें भारत में रहने वाले मुसलमानों की चिंताओं का तो ध्यान रखा गया था, लेकिन वहां के हिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया गया था।
शाह ने कहा कि आज बीजेपी सरकार सीएए के जरिए डॉ. मुखर्जी की उन्हीं चिंताओं का समाधान कर रही है।
भाषण के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370 को हटाने का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. मुखर्जी के अधूरे संकल्प को पूरा किया है, जिससे आज कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन चुका है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एक के बाद एक आई सरकारों ने 1953 में कश्मीर में डॉ. मुखर्जी की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत की कभी ठीक से जांच नहीं होने दी।
अमित शाह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि भारत का विकास मॉडल पश्चिम से उधार लेने के बजाय अपनी सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी इसी सिद्धांत को अपनाते हुए भारत की नींव को मजबूत कर रहे हैं और 2047 तक पूरी तरह विकसित भारत बनाने की यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं।
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